बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की रणनीतियों के बीच एक बार फिर से अपनी खोई हुई सियासी जमीन मजबूत करने की कवायद में जुट गई है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने उत्तराधिकारी और नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद को एक बार फिर से चुनावी कमान सौंप दी है। बसपा हाईकमान द्वारा जारी नए राजनीतिक कार्यक्रम के मुताबिक, आकाश आनंद आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के साथ-साथ पंजाब और उत्तराखंड में भी पार्टी के चुनाव प्रचार को धार देंगे। इस राजनीतिक फेरबदल और ताबड़तोड़ रैलियों के ऐलान से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि युवाओं के बीच आकाश आनंद की आक्रामक कार्यशैली का एक अलग ही क्रेज माना जाता है।
बुलंदशहर से होगी शुरुआत, ताबड़तोड़ रैलियों का पूरा शेड्यूल
पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आकाश आनंद 28 अक्टूबर को बुलंदशहर के अनूपशहर से अपनी पहली बड़ी जनसभा के साथ चुनावी मैदान में ताल ठोंकते नजर आएंगे। इसके बाद उनका सियासी दौरा लगातार जारी रहेगा, जिसमें 2 नवंबर को सहारनपुर के नकुड़, 20 नवंबर को अयोध्या के बीकापुर, 22 नवंबर को ताजनगरी आगरा और 29 नवंबर को कानपुर के बिल्हौर में विशाल रैलियों का कार्यक्रम तय किया गया है। उत्तर प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्यों पर भी बसपा का पूरा फोकस है, जिसके तहत 26 नवंबर को पंजाब और 6 दिसंबर को उत्तराखंड के हरिद्वार में भी उनकी बड़ी सभाएं आयोजित की जाएंगी।
उतार-चढ़ाव भरा राजनीतिक सफर और पार्टी में वापसी
राजनीतिक जानकारों के लिए आकाश आनंद का पार्टी के भीतर सफर हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। दिसंबर 2023 में मायावती ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी और नेशनल कोऑर्डिनेटर घोषित किया था, जिसके बाद से वह पार्टी के भीतर लगातार सक्रिय रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों में उनके राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले और उन्हें कई बार पार्टी पदों से जोड़ा और हटाया गया। तमाम सियासी उठापटक के बाद 5 अक्टूबर को तीसरी बार उनकी पार्टी में वापसी हुई और मायावती ने उन पर एक बार फिर से पूरा भरोसा जताते हुए राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी है।
युवाओं में जोश भरने की रणनीति और सियासी मायने
बसपा का यह कदम आगामी चुनावों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि आकाश आनंद के मैदान में उतरने से बहुजन समाज पार्टी के पारंपरिक कैडर के साथ-साथ युवा मतदाताओं में भी नया जोश भरा जा सकेगा। हाल के दिनों में कई विधानसभा क्षेत्रों के स्थानीय नेता भी लगातार उनकी रैलियां कराने की मांग कर रहे थे। अब देखना यह होगा कि मायावती द्वारा सौंपी गई इस बड़ी जिम्मेदारी को निभाते हुए आकाश आनंद बसपा के सियासी जनाधार को कितना मजबूत कर पाते हैं और विपक्षी दलों को चुनावी मैदान में कितनी कड़ी टक्कर दे पाते हैं।
