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फूट-फूटकर रोया आतंकी आका: लीक ऑडियो में मसूद अजहर ने खोले जेल के राज, सुरंग और पिटाई से कांप उठा जैश

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जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर, जिसे लंबे समय तक आतंक का पर्याय माना गया, अब अपनी ही आवाज़ में टूटता नजर आ रहा है। सामने आए लीक ऑडियो में वह पहली बार अपने अतीत के उन पन्नों को पलटता है, जिन पर उसने सालों तक चुप्पी साधे रखी। कभी अपने नाम से दहशत फैलाने वाला मसूद अब बेबसी, डर और पश्चाताप की भाषा बोलता सुनाई देता है। ऑडियो में वह स्वीकार करता है कि जेल की सलाखों के पीछे बिताए गए दिन उसके लिए किसी सज़ा से कम नहीं थे। उसकी आवाज़ में घमंड नहीं, बल्कि कांपती हुई स्वीकारोक्ति है—एक ऐसा एहसास जो उसके समर्थकों के लिए भी चौंकाने वाला है। मसूद कहता है कि उसे आज भी जेल अधिकारियों का खौफ सताता है और उन घटनाओं की याद आते ही उसकी आवाज़ भर्रा जाती है। यह पहला मौका है जब उसने खुद को मज़बूत दिखाने की जगह, अपनी कमज़ोरी को सार्वजनिक तौर पर कबूला है।

जेल से भागने की साजिश और सुरंग का सच

ऑडियो में मसूद अजहर ने यह भी माना कि उसने जम्मू की कोट भलवाल जेल से भागने की साजिश रची थी। उसके मुताबिक, इस योजना पर लंबे समय तक काम किया गया और जेल के भीतर ही एक सुरंग तैयार की गई। मसूद ने बताया कि सुरंग बनाने के लिए औजार मंगवाए गए और हर कदम बेहद गोपनीय तरीके से उठाया गया। उसका दावा है कि आखिरी दिन सब कुछ तैयार था और वह जेल से निकलने ही वाला था, लेकिन तभी सुरक्षा एजेंसियों को भनक लग गई। मसूद के शब्दों में, “बस एक कदम बाकी था, तभी सब कुछ खत्म हो गया।” इस स्वीकारोक्ति ने उसकी उस छवि को तोड़ दिया है जिसमें वह खुद को हर हाल में बच निकलने वाला चालाक आतंकी दिखाता रहा। ऑडियो से साफ है कि यह साजिश जितनी सुनियोजित थी, उतनी ही बड़ी नाकामी में बदल गई।

पकड़े जाने के बाद की रात और पिटाई की दहशत

मसूद अजहर ने जिस घटना का सबसे ज्यादा जिक्र किया, वह है पकड़े जाने के बाद की रात। उसने बताया कि जैसे ही वह सुरंग के जरिए भागने की कोशिश में पकड़ा गया, जेल प्रशासन ने सख्ती बरती। मसूद के अनुसार, उस वक्त जो हुआ, वह उसकी जिंदगी का सबसे डरावना अनुभव था। उसने कहा कि उसकी और उसके साथियों की बुरी तरह पिटाई हुई। ऑडियो में वह यह तक कहता सुनाई देता है कि उसके साथियों के शरीर “डबल रोटियों की तरह सूज गए थे।” यह बयान उसके उस चेहरे को उजागर करता है, जो अब तक पर्दे के पीछे छिपा था। जिस शख्स ने कई हमलों की साजिशें रचीं, वह खुद अपने साथ हुई मारपीट को याद कर आज भी सहम जाता है। उसकी आवाज़ में दर्द साफ झलकता है और यह एहसास होता है कि कानून के सामने उसका रुतबा भी बेअसर साबित हुआ।

आतंक की राजनीति पर असर और संदेश

लीक ऑडियो के सामने आने के बाद मसूद अजहर की छवि पर गहरा असर पड़ा है। वर्षों तक उसने खुद को अडिग और निडर दिखाया, लेकिन अब उसकी ही जुबानी डर और हार की कहानी सामने है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के खुलासे आतंकी संगठनों के भीतर मनोबल को तोड़ते हैं। जब सरगना खुद अपने अतीत की नाकामियों और सज़ाओं की बात करता है, तो संगठन की कथित ताकत पर सवाल उठते हैं। यह ऑडियो उन युवाओं के लिए भी एक संदेश है जो आतंक की राह पर चलने का भ्रम पालते हैं—कि अंत में न दहशत काम आती है, न घमंड। मसूद अजहर का यह स्वीकार, चाहे किसी भी मकसद से किया गया हो, यह दिखाता है कि कानून और सुरक्षा व्यवस्था के सामने सबसे बड़ा आतंकी भी बेबस हो सकता है।

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