मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ओरछा में हर दिन एक अनोखा दृश्य देखने को मिलता है। यहां सुबह होते ही पुलिस की टुकड़ी पंक्ति बनाकर राम राजा मंदिर पहुंचती है और भगवान राम को औपचारिक रूप से सलामी देती है। यह परंपरा किसी खास आयोजन या त्योहार में नहीं, बल्कि रोजाना निभाई जाती है। देश में यह एकमात्र स्थान है जहां किसी मानव राजा को नहीं, बल्कि भगवान को राज्य का वास्तविक राजा मानते हुए सलामी दी जाती है। यही कारण है कि ओरछा की पहचान न सिर्फ धार्मिक, बल्कि राजसी परंपराओं के कारण भी विश्वभर में अद्वितीय है।
राम राजा मंदिर और रानी महल की ऐतिहासिक कहानी
ओरछा का राम राजा मंदिर और पास स्थित रानी महल अपनी ऐतिहासिक और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध हैं। मान्यता है कि सोलहवीं शताब्दी में ओरछा की रानी कुंवरि गणेशी ने भगवान श्रीराम को अपने महल में लाने का संकल्प लिया था। कहा जाता है कि उन्होंने कठोर तप किया और भगवान राम बाल रूप में प्रकट होकर उनके साथ ओरछा आने के लिए सहमत हुए। किंतु शर्त यह थी कि जहां पहली बार उन्हें बैठाया जाएगा, वहीं वे स्थायी रूप से विराजेंगे। जब मूर्ति रानी महल में लाई गई, तब वह वहीं विराजमान रह गई। इसके बाद महल को ही मंदिर घोषित कर दिया गया। इसी वजह से इस स्थान को मंदिर नहीं बल्कि ‘राम राजा मंदिर’ कहा जाता है, जहां भगवान की पूजा राजा के रूप में होती है।
500 साल पुरानी वह परंपरा जिसने बदला शहर का स्वरूप
यह परंपरा लगभग 500 वर्ष पुरानी मानी जाती है, जब ओरछा के राजा मधुकर शाह ने भगवान राम को राज्य का वास्तविक राजा घोषित किया। उनके इस निर्णय के बाद से ओरछा में हर राजकीय कार्य भगवान राम के नाम से शुरू होने लगा। आज भी यहां कोई भी VIP, नेता या अधिकारी सलामी नहीं ले सकता। चाहे वह राष्ट्रपति हों, प्रधानमंत्री हों या देश का कोई बड़ा अधिकारी—राजा राम की गरिमा के आगे सभी समान माने जाते हैं। सलामी देने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ भगवान राम को है। पुलिस प्रतिदिन परेड के साथ मंदिर के बाहर पहुंचती है, शस्त्र झुकाए जाते हैं और पूरी गरिमा के साथ सलामी दी जाती है। यह दृश्य देखने के लिए हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इकट्ठा होते हैं।
क्यों माना जाता है ओरछा को दुनिया में अनोखा स्थान?
दुनिया के किसी भी हिस्से में भगवान को राजा के रूप में राजकीय सलामी देने की ऐसी परंपरा देखने को नहीं मिलती। यही कारण है कि ओरछा विश्व स्तर पर भी एक अनोखा धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र माना जाता है। यहां आने वाले लोग न केवल मंदिर की भव्यता और प्राचीन महलों को देखते हैं, बल्कि इस अद्भुत परंपरा के साक्षी बनकर लौटते हैं। स्थानीय लोग मानते हैं कि राजा राम सिर्फ मंदिर के देवता नहीं, बल्कि उनके वास्तविक शासनकर्ता हैं जो नगर की रक्षा करते हैं और हर भक्त का ध्यान रखते हैं। यही श्रद्घा इस परंपरा को सदियों बाद भी जीवित रखे हुए है। ओरछा आज भी इतिहास, विश्वास और संस्कृति का ऐसा संगम है, जिसकी मिसाल शायद ही कहीं और मिले।
