मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के महादेवगढ़ क्षेत्र में मंगलवार को एक अनोखा मामला सामने आया, जिसने पूरे इलाके में चर्चा बढ़ा दी। गुड़ी क्षेत्र की रहने वाली 22 वर्षीय मुस्लिम युवती सानिया ने औपचारिक रूप से सनातन धर्म अपना लिया और हिंदू युवक निखिल से शिव मंदिर में वैदिक रीति से विवाह कर लिया। धर्मांतरण के बाद सानिया का नया नाम ‘सती’ रखा गया। यह घटना इसलिए और चर्चाओं में आ गई क्योंकि युवती ने धर्म परिवर्तन से पहले न केवल धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया, बल्कि अपने जीवन के फैसले बेहद सोच-समझकर लिए।
सानिया और निखिल की मित्रता पहले से थी, लेकिन युवती लंबे समय से आध्यात्मिकता और सनातन संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही थी। युवती का कहना है कि उसके इस फैसले में किसी भी प्रकार का दबाव नहीं था, बल्कि यह उसकी अपनी इच्छा और अनुभव का परिणाम है। स्थानीय लोगों की मानें तो यह मामला युवाओं में बढ़ती आध्यात्मिक रुचि का भी उदाहरण है।
बचपन से इस्लाम का पालन, लेकिन मन खिंचता रहा सनातन की ओर
सानिया का जन्म और पालन-पोषण एक मुस्लिम परिवार में हुआ, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों का नियमित रूप से पालन होता था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में उसके भीतर अध्यात्म के प्रति गहरी जिज्ञासा बढ़ने लगी। उसे विशेष रूप से भारतीय संस्कृति, पूजा-पद्धति और प्राचीन ग्रंथों में रुचि होने लगी। सानिया बताती हैं कि कई बार उन्हें महसूस होता था कि वह जीवन और आध्यात्मिकता के बारे में और अधिक समझना चाहती हैं।
उसी खोज ने उन्हें पिछले तीन महीनों के लिए बनारस की ओर खींच लिया। काशी विश्वनाथ की नगरी में रहकर उन्होंने पूजा-पद्धति, संस्कारों और धर्मशास्त्रों को समझने का प्रयास किया। काशी में रहने के दौरान उन्होंने रामायण, गीता और अन्य ग्रंथों का अध्ययन किया। सानिया कहती हैं कि रामायण पढ़ने के बाद उनके भीतर गहरी शांति उत्पन्न हुई और धर्म तथा जीवन के अर्थ को नए तरीके से समझने का अवसर मिला। यही अनुभव उनके परिवर्तन का आधार बना।
सनातन संस्कृति और रामायण का प्रभाव
सानिया का कहना है कि रामायण ने उनकी सोच को पूरी तरह बदल दिया। उन्हें श्रीराम के आदर्श, माता सीता की मर्यादा, भाईचारे का भाव और धर्म के प्रति समर्पण बेहद प्रभावित करने लगे। उन्होंने महसूस किया कि सनातन धर्म केवल आस्था ही नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक संतुलित और प्रेमपूर्ण मार्ग है। उनके अनुसार, रामायण पढ़ने के बाद उन्हें अपने भीतर एक अपनापन और संतोष महसूस हुआ।
बनारस के प्रवास के दौरान सानिया कई विद्वानों, पुजारियों और अध्यात्म से जुड़े लोगों के संपर्क में आईं। उनके अनुसार, वहां उन्हें किसी ने धर्म बदलने के लिए प्रेरित नहीं किया, बल्कि सबने उन्हें अपनी समझ और भावना के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी। युवती ने बताया कि यही स्वतंत्रता और सम्मान उनके मन में सनातन धर्म के प्रति और अधिक आकर्षण का कारण बना।
शिव मंदिर में वैदिक रीति से विवाह, नाम रखा गया ‘सती’
सनातन धर्म अपनाने के बाद सानिया ने आध्यात्मिक मंत्रों और वैदिक विधियों के बीच अपना नाम ‘सती’ रखा। इसके बाद स्थानीय शिव मंदिर में युवक निखिल से सात फेरे लेकर विवाह संपन्न हुआ। शादी के दौरान परिवार के कुछ लोग, स्थानीय ग्रामीण और मंदिर समिति के सदस्य मौजूद रहे। विवाह के समय पंडितों ने नवदंपति को आशीर्वाद देते हुए कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का ही नहीं, बल्कि दो संस्कृतियों और विचारों का सुंदर मिलन भी हो सकता है, बशर्ते उसका आधार प्रेम और विश्वास हो।
सती ने विवाह के बाद कहा कि उन्हें सनातन धर्म में प्रेम और शांति का सच्चा रूप मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि उनका यह निर्णय दिल से लिया गया है और वह उम्मीद करती हैं कि समाज उनके फैसले को सम्मान की दृष्टि से देखेगा। निखिल ने भी कहा कि उनका प्रेम किसी धर्म या समुदाय का मोहताज नहीं था, बल्कि हमेशा एक-दूसरे की समझ और सम्मान पर आधारित था।
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