उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के उसहैत इलाके में स्थित चमेली देवी इंटर कॉलेज में सोमवार को एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने स्थानीय लोगों को हैरान और चिंतित कर दिया। जूनियर कक्षाओं में पढ़ने वाली कुछ छात्राओं ने स्कूल प्रबंधन से शिकायत की कि उनकी पानी की बोतलों में किसी ने गंदगी भर दी है। छात्राओं ने बताया कि बोतलें कक्षा में ही रखी थीं और जब उन्होंने पानी पीने की कोशिश की, तो उन्हें बदबू और बदले हुए स्वाद का अंदेशा हुआ। यह जानकारी मिलते ही स्कूल प्रशासन ने तुरंत शिक्षकों के साथ मामले की पड़ताल शुरू की।
छात्राओं की शिकायत जैसे ही बाकी बच्चों और अभिभावकों तक पहुंची, स्कूल के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी। कुछ ही देर में यह मामला पूरे इलाके में फैल गया। अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन से सवाल पूछते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या-क्या इंतज़ाम किए गए हैं और कैसे कोई छात्राएं की बोतलों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। कई अभिभावक इस बात से नाराज़ थे कि ऐसी गंभीर घटना के बावजूद स्कूल की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था कमजोर साबित हुई है।
इसी बीच, करणी सेना के कार्यकर्ता भी स्कूल पहुंच गए और उन्होंने प्रबंधन पर पहले से चली आ रही शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, यदि स्कूल समय रहते सख्ती दिखाता, तो इस तरह की हरकतें होने की हिम्मत किसी में नहीं होती। हालात को देखते हुए स्थानीय पुलिस टीम को मौके पर बुलाया गया ताकि भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके और माहौल शांत रहे। पुलिस ने स्कूल स्टाफ और छात्राओं से विस्तृत जानकारी लेकर प्रारंभिक जांच आगे बढ़ाई।
अभिभावकों का गुस्सा, स्कूल प्रबंधन पर आरोप
जब अभिभावकों को यह पता चला कि छात्राओं की बोतलों से गंदगी मिली है, तो माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया। कई अभिभावकों ने बताया कि पहले भी बच्चों की तरफ से स्कूल में शरारतें और अनुशासनहीनता की शिकायतें आई थीं, लेकिन उन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना था कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर ऐसी घटनाओं का बुरा असर पड़ता है और स्कूल प्रशासन को शुरू से ही सतर्क रहना चाहिए था।
करणी सेना के जिला प्रतिनिधि ने भी आरोप लगाया कि स्कूल में सुरक्षा व्यवस्था बेहद ढीली है और इस कारण बच्चों के बैग, बोतलें और सामान सुरक्षित नहीं रह पाता। भीड़ का कहना था कि यह घटना किसी साधारण शरारत की श्रेणी में नहीं आती, बल्कि इससे छात्राओं का आत्मविश्वास और विश्वास दोनों टूटता है। पुलिस अधिकारियों ने अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि वे इस मामले की पारदर्शी और कड़ी जांच करेंगे और दोषी पाए जाने वालों पर सख्ती से कार्रवाई होगी।
स्कूल प्रबंधन की तरफ से कहा गया कि घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और वे सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि परिसर की सुरक्षा और निगरानी बढ़ाई जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोका जा सके। अभिभावकों ने मांग की कि स्कूल नियमित रूप से क्लासरूम की निगरानी करे और बच्चों के व्यवहार पर ध्यान दे।
पुलिस ने चार छात्रों को पकड़ा
पुलिस ने जब स्कूल के भीतर मौजूद छात्रों, शिक्षकों और सीसीटीवी फुटेज की मदद से जांच को आगे बढ़ाया, तो संदेह चार छात्रों पर जाकर ठहरा। पुलिस ने इशरत, मोहम्मद अहमद, शाबिर और शराफत नाम के छात्रों को पूछताछ के लिए उठाया। शुरुआती जांच में इन पर लगे आरोपों को सत्य माना गया। इसके बाद चारों छात्रों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
घटना के बाद स्कूल में बच्चों और अभिभावकों का माहौल अब भी तनावपूर्ण है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर छात्र कक्षा में ऐसी हरकत क्यों करेंगे और क्या इसके पीछे किसी तरह की व्यक्तिगत दुश्मनी या समूहगत दबाव था। पुलिस ने कहा है कि वे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यदि इसमें किसी और की भूमिका सामने आती है, तो उसे भी गिरफ्तार किया जाएगा।
जिले के अधिकारियों ने निर्देश देते हुए कहा कि सभी स्कूलों में सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि बच्चों के सामान और क्लासरूम की निगरानी पुख्ता तरीके से हो। घटना के बाद अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन से लिखित आश्वासन की भी मांग की है कि सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
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