मध्यप्रदेश के इंदौर शहर से सामने आए एक वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। यह वीडियो क्रिसमस के दिन आयोजित एक कार्यक्रम का बताया जा रहा है, जहां खुशी और उत्सव के माहौल के बीच अचानक हंगामा खड़ा हो गया। इंदौर के लोकप्रिय ‘द हब फूड स्ट्रीट’ में एक निजी कंपनी द्वारा क्रिसमस सेलिब्रेशन का आयोजन किया गया था। रंग-बिरंगी लाइटों, सजावट और क्रिसमस ट्री के साथ यह कार्यक्रम सामान्य तरीके से चल रहा था, तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और उन्होंने कार्यक्रम का विरोध करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह विरोध तोड़फोड़ में बदल गया और क्रिसमस ट्री को नुकसान पहुंचाया गया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो किसी मौजूद व्यक्ति ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद देशभर में लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सार्वजनिक जगहों पर धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा और स्वतंत्रता को लेकर स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।
वायरल वीडियो में क्या दिखा, क्यों भड़के लोग
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिखाई देता है कि कार्यक्रम के दौरान कुछ लोग तेज आवाज में धार्मिक नारे लगाते हुए फूड स्ट्रीट में लगे क्रिसमस ट्री के पास पहुंचते हैं और उसमें तोड़फोड़ करने लगते हैं। यह घटना लसूडिया थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। वीडियो में मौजूद भीड़ में डर और असहजता का माहौल साफ नजर आता है। कई लोग चुपचाप खड़े होकर यह सब देखते रहते हैं, जबकि कुछ लोग मोबाइल से वीडियो बनाते दिखाई देते हैं। जिस तरह से सार्वजनिक जगह पर एक धार्मिक आयोजन के दौरान हंगामा किया गया, उसने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाए हैं कि क्या किसी भी आयोजन को जबरन रोकना और धार्मिक प्रतीकों को नुकसान पहुंचाना कानूनन सही है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय रहते सख्त कार्रवाई न होने से उपद्रवियों के हौसले बढ़ते हैं।
आयोजक महिला की भावुक अपील ने खींचा ध्यान
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस महिला आयोजक की हो रही है, जो वीडियो में मंच से उपद्रव कर रहे लोगों से लगातार अपील करती नजर आती है। वह साफ शब्दों में कहती है कि क्रिसमस ट्री न तोड़ा जाए, क्योंकि इसे सजाने में कई लोगों की मेहनत लगी है। महिला यह भी कहती है कि वह किसी को नारे लगाने से नहीं रोक रही हैं, लेकिन तोड़फोड़ और हिंसा न की जाए। हालात इतने तनावपूर्ण हो जाते हैं कि वह खुद ‘जय सिया राम’ और ‘जय श्री राम’ के नारे लगवाने लगती हैं, ताकि सामने खड़े लोग शांत हो जाएं और कार्यक्रम बिना किसी नुकसान के खत्म हो सके। वीडियो में महिला यह भी बताती हुई दिखाई देती है कि वह खुद क्रिश्चियन हैं और यह इवेंट उन्होंने शांति और खुशी के लिए आयोजित किया था। उनकी यह अपील और संयम सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। कई लोग इसे मजबूरी में लिया गया कदम बता रहे हैं, तो कई इसे सामाजिक सौहार्द की एक मिसाल के रूप में देख रहे हैं।
असली धर्म नफ़रत नहीं, इंसानियत सिखाता है।
धार्मिक नारे आस्था के प्रतीक होते हैं, न कि हिंसा के औज़ार। इंदौर के द हब में क्रिसमस के दौरान तोड़फोड़ और “जय श्री राम” के नारे, भारत की साझी संस्कृति को कलंकित करते हैं। pic.twitter.com/EPokHqOgx1
— Dr. Laxman Yadav (@DrLaxman_Yadav) December 26, 2025
पुलिस का एक्शन और उठते कानूनी सवाल
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आ चुका है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, वीडियो के आधार पर उन लोगों की पहचान की जाएगी, जिन्होंने तोड़फोड़ की और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की। दोषियों पर कानूनी कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया है। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक स्वतंत्रता, सार्वजनिक सुरक्षा और कानून के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी समुदाय या आयोजन को डर के साये में कार्यक्रम करने की नौबत न आए। इंदौर का यह वीडियो अब सिर्फ एक शहर की घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह देशभर में धार्मिक सहिष्णुता और कानून व्यवस्था पर चल रही बहस का हिस्सा बन चुका है।
