पश्चिम बंगाल के विधायक और बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर ने कहा है कि उन्हें लगातार फोन पर जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। कबीर के अनुसार, ये कॉल राज्य के बाहर से आ रहे हैं और धमकियों का स्वरूप गंभीर है। उन्होंने कहा कि इस तरह की धमकियों के चलते उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है।
विधायक ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह अपनी और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार से मदद मांग रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि मामले को हल्के में नहीं लिया जा रहा और हर कानूनी विकल्प का इस्तेमाल किया जाएगा।
सुरक्षा के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे कबीर
हुमायूं कबीर ने बताया कि वह उच्च न्यायालय (HC) का रुख भी करेंगे ताकि उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई जा सके। उन्होंने कहा कि यह कदम इसलिए जरूरी है क्योंकि धमकियों का स्रोत राज्य के बाहर से है और इसे रोकना राज्य पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कबीर ने यह भी कहा कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय से निर्देश मांगना उनका संवैधानिक अधिकार है। विधायक ने कहा कि वे कानूनी रूप से हर संभव कदम उठाएंगे ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके
राजनीतिक पृष्ठभूमि और निलंबन का मुद्दा
हुमायूं कबीर को हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने निलंबित कर दिया था। यह कदम पार्टी और विधायक के बीच राजनीतिक मतभेदों को दर्शाता है। निलंबन के बाद से ही कबीर की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे थे।
निलंबन और धमकियों का सिलसिला एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, कबीर ने स्पष्ट किया कि उनका ध्यान केवल अपनी और परिवार की सुरक्षा पर है और वे राजनीतिक विवादों से अलग रहकर कानूनी उपाय अपनाएंगे।
सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई की अहमियत
हुमायूं कबीर की मांग है कि उन्हें तत्काल व्यक्तिगत सुरक्षा मुहैया कराई जाए। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार मदद नहीं करती है तो वह न्यायालय में याचिका दायर करेंगे। उनका मानना है कि किसी भी विधायक या नागरिक के लिए जान से मारने की धमकियां गंभीर अपराध हैं और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य और केंद्र सरकार दोनों का यह दायित्व बनता है कि किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, खासकर जब धमकियां राजनीतिक या धार्मिक पृष्ठभूमि वाली हों। हुमायूं कबीर का मामला इसे साफ तौर पर दर्शाता है और यह आगामी दिनों में कानूनी और राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बना रहेगा।
