भोजशाला में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद शनिवार सुबह ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा था। सूरज निकलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला परिसर स्थित वाग्देवी मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचने लगे। मंदिर परिसर में सुबह से ही घंटियों की आवाज, अगरबत्ती की खुशबू और जयकारों का माहौल दिखाई दिया। लोग शांतिपूर्वक मां वाग्देवी के दर्शन कर पूजा कर रहे थे। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद भोजशाला परिसर को मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र माना था, जिसके बाद हिंदू समाज में खुशी की लहर दौड़ गई। फैसले के अगले ही दिन श्रद्धालुओं का उत्साह साफ नजर आया। कई लोग अपने परिवार के साथ पहुंचे तो कुछ वर्षों पुरानी मनोकामना पूरी होने की भावना लेकर यहां आए। लोगों का कहना था कि अब वे बिना किसी विवाद या रोक-टोक के नियमित रूप से पूजा कर सकेंगे। पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई थी ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। प्रशासन की निगरानी में श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराए गए।
वर्षों के संघर्ष के बाद छलका लोगों का भावुक दर्द
भोजशाला आंदोलन से लंबे समय से जुड़ी महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की आंखों में इस फैसले के बाद भावुकता साफ दिखाई दी। आंदोलन से जुड़ी सरला नाम की महिला ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक इस दिन का इंतजार किया है। उनके मुताबिक जैसे ही अदालत का फैसला आया, पूरे हिंदू समाज में खुशी फैल गई। कई लोग भावुक होकर रो पड़े, जबकि कुछ लोगों ने मिठाइयां बांटकर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कानूनी जीत नहीं बल्कि लंबे संघर्ष और आस्था की विजय है। भोजशाला पहुंचे श्रद्धालु प्रमोद सोलंकी ने बताया कि वह पहले भी हर मंगलवार यहां पूजा के लिए आते थे, लेकिन अब माहौल पूरी तरह बदल गया है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें खुलकर पूजा करने का अवसर मिला है और वे प्रतिदिन यहां आने की इच्छा रखते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि भोजशाला सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक भी है। कई लोगों ने मंदिर परिसर में दीप जलाए और मां वाग्देवी के सामने विशेष प्रार्थना की। फैसले के बाद धार शहर में भी लोगों के बीच चर्चा का माहौल बना हुआ है और कई संगठनों ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया है।
हाईकोर्ट के फैसले ने बदली पूरे विवाद की दिशा
Madhya Pradesh High Court ने 15 मई 2026 को दिए अपने फैसले में कहा कि भोजशाला परिसर-कमाल मस्जिद का विवादित हिस्सा मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र माना जाएगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि परिसर का नियंत्रण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के पास ही रहेगा। फैसले के बाद कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। मामले से जुड़े अधिवक्ता विष्णु जैन ने कहा कि भोजशाला की मूल संरचना राजा भोज द्वारा बनवाई गई थी और अदालत ने पूजा-अर्चना के अधिकार को मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि अब यहां नियमित पूजा होगी और नमाज की अनुमति नहीं होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज अपनी मांग सरकार के सामने रख सकता है और सरकार चाहे तो वैकल्पिक जमीन उपलब्ध करा सकती है। कोर्ट के फैसले के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। इतिहासकारों और धार्मिक संगठनों के बीच भी भोजशाला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और कानून व्यवस्था का पालन करने की अपील की है।
धार में बढ़ी हलचल, प्रशासन पूरी तरह सतर्क
Dhar में हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। भोजशाला परिसर और आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय बाद शहर में ऐसा माहौल देखने को मिला है, जहां लोग बड़ी संख्या में धार्मिक आस्था के साथ एकत्र हो रहे हैं। कई श्रद्धालु सुबह-सुबह फूल, नारियल और पूजा सामग्री लेकर पहुंचे। मंदिर परिसर में लोगों ने शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की। सामाजिक संगठनों का कहना है कि अब यह स्थान सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकता है। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक हलकों में भी इस फैसले को लेकर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कई नेताओं ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया है, जबकि कुछ संगठनों ने इस मामले में आगे कानूनी विकल्प तलाशने की बात कही है। फिलहाल भोजशाला में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ यह साफ संकेत दे रही है कि अदालत के फैसले ने लोगों की भावनाओं को गहराई से प्रभावित किया है।
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