हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पालमपुर निवासी 26 वर्षीय मर्चेंट नेवी अधिकारी रक्षित चौहान इन दिनों अमेरिका की हिरासत में हैं। वह उन तीन भारतीय नागरिकों में शामिल हैं, जिन्हें इस सप्ताह उत्तरी अटलांटिक महासागर में अमेरिकी तटरक्षक बल ने एक रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर को जब्त करने के बाद हिरासत में लिया। यह टैंकर वेनेजुएला से संबंधित बताया जा रहा है और उस पर कुल 28 चालक दल के सदस्य सवार थे। रक्षित चौहान इस जहाज पर एक रूसी कंपनी के तहत नौकरी कर रहे थे और यह उनका पहला समुद्री कार्य था। जैसे ही यह खबर भारत पहुंची, परिवार ही नहीं बल्कि पूरे इलाके में चिंता और बेचैनी का माहौल बन गया। स्थानीय लोग भी रक्षित की सुरक्षित वापसी की दुआ कर रहे हैं।
19 फरवरी को तय है शादी, मां की आंखों में इंतजार और दुआ
रक्षित चौहान की शादी 19 फरवरी को तय है। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, निमंत्रण पत्र छप चुके थे और रिश्तेदारों को बुलाया जा रहा था। इसी बीच बेटे की गिरफ्तारी की खबर ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। रक्षित की मां रीता देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनके बेटे को सुरक्षित भारत वापस लाया जाए। उन्होंने बताया कि 7 जनवरी को आखिरी बार रक्षित से बात हुई थी, उसके बाद से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। मां का कहना है कि हर पल दिल घबराया रहता है और सिर्फ यही दुआ है कि शादी से पहले बेटा घर लौट आए। परिवार का कहना है कि रक्षित किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं था, वह सिर्फ अपनी नौकरी कर रहा था।
पहला समुद्री मिशन बना संकट, पिता ने बताई पूरी घटना
रक्षित चौहान 1 अगस्त 2025 को मर्चेंट नेवी में शामिल हुए थे। एक रूसी शिपिंग कंपनी ने उन्हें उनके पहले असाइनमेंट के तौर पर तेल टैंकर ‘मरीनरा’ पर तैनात किया था। रक्षित के पिता रणजीत सिंह चौहान के अनुसार, जहाज वेनेजुएला की ओर जा रहा था, लेकिन रास्ते में सीमा के पास रोक दिया गया। करीब 10 दिन तक जहाज वहीं खड़ा रहा, जिसके बाद कंपनी ने उसे वापस लौटने का आदेश दिया। लेकिन इससे पहले कि जहाज लौट पाता, 7 जनवरी को अमेरिकी तटरक्षक बल ने उसे जब्त कर लिया और सभी चालक दल के सदस्यों को हिरासत में ले लिया। पिता का कहना है कि उनका बेटा सिर्फ एक कर्मचारी है और उसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति या प्रतिबंधों की कोई जानकारी नहीं थी।
परिवार सदमे में, सरकार से उम्मीद और गांव की बेचैनी
रक्षित के पिता ने बताया कि स्थानीय प्रशासन ने उनसे संपर्क किया है और पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। पालमपुर के विधायक ने परिवार को भरोसा दिलाया है कि वह इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएंगे और केंद्र सरकार तक बात पहुंचाई जाएगी। रक्षित के भाई ने बताया कि जिस घर में शादी की खुशियां गूंज रही थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है। रंगाई-पुताई चल रही थी, खरीदारी हो रही थी, लेकिन अब हर कोई फोन की घंटी और किसी अच्छी खबर का इंतजार कर रहा है। परिवार को उम्मीद है कि भारत सरकार इस मामले में कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप करेगी और रक्षित सहित सभी भारतीयों को जल्द रिहा कराया जाएगा। गांव के लोग भी एकजुट होकर प्रार्थना कर रहे हैं कि हिमाचल का यह बेटा सुरक्षित अपने घर लौटे और उसकी शादी तय समय पर हो सके।
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