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प्रसाद खाने के बाद बिगड़ी 200 लोगों की तबीयत, कुत्ते ने कर दिया था झूठा, गांव में मचा हड़कंप

धनबाद के लोधरिया गांव में सरस्वती पूजा के प्रसाद में कुत्ते द्वारा जूठा किए जाने से 200 से अधिक ग्रामीण बीमार, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल। पढ़ें पूरी खबर और जानें प्रशासन की कार्रवाई।

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धनबाद के लोधरिया गांव में आयोजित सरस्वती पूजा के अवसर पर प्रसाद ने अचानक गांव में भय का माहौल पैदा कर दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, 23 जनवरी को पूजा का प्रसाद तैयार किया गया था जिसमें बुंदिया, चुड़ा और फल शामिल थे। दुर्भाग्यवश, एक आवारा कुत्ता प्रसाद तक पहुँच गया और उसे जूठा कर गया, लेकिन यह बात बच्चों द्वारा किसी को बताई नहीं गई। प्रसाद तब तक लगभग 200 ग्रामीणों में वितरित हो चुका था। जैसे ही लोगों को यह जानकारी मिली, गांव में हड़कंप मच गया और कई ग्रामीणों में बीमार होने की शिकायतें सामने आने लगीं।

इस घटना ने केवल स्वास्थ्य को ही खतरे में नहीं डाला, बल्कि गांव के विश्वास और सुरक्षा की भावना पर भी सवाल खड़े कर दिए। लोगों में डर की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें अपने घरों में बंद रहना पड़ा और कुछ ने नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र की ओर दौड़ लगाई।

स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्था और टीकाकरण की चुनौती

घटना के बाद जब ग्रामीण टुंडी सीएचसी पहुंचे और एंटी‑रेबीज़ वैक्सीन लेने का प्रयास किया, तो वहां व्यवस्था की गंभीर कमी और डॉक्टरों की अनुपस्थिति सामने आई। प्रभारी डॉ. श्रवण कुमार ने बताया कि शुरुआती दो दिनों में लगभग 80 लोगों को टीका लगाया गया, लेकिन वैक्सीन की मात्रा सीमित होने के कारण 50 अतिरिक्त वैक्सीन की मांग धनबाद सदर अस्पताल से की गई।

स्थानीय लोगों ने बताया कि बच्चों और बुजुर्गों सहित कई लोग भूख, प्यास और थकावट के बावजूद अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इस प्रकार की परिस्थिति ने प्रशासन की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर पर्याप्त वैक्सीन और स्टाफ उपलब्ध होता, तो बड़ी संख्या में लोगों को बीमारी के खतरे से बचाया जा सकता था।

ग्रामीणों का गुस्सा: प्रशासन पर उठे सवाल

ग्रामीणों के अनुसार, सीएचसी में व्यवस्थापन की कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया। डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी के कारण लोगों को पंजीकरण और टीकाकरण में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई लोग स्वास्थ्य केंद्र के बाहर घंटों इंतजार करते रहे और कुछ बच्चों की स्थिति देख कर ग्रामीण चिंतित हो उठे।

इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रामीण स्वास्थ्य संपर्क और जागरूकता के मामले में अभी भी कमजोर हैं। लोग एंटी‑रेबीज़ टीकाकरण और पशु संपर्क से होने वाली बीमारियों के बारे में जागरूक नहीं थे। कुछ परिवारों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की तैयारी

टुंडी के अंचल अधिकारी सुरेश प्रसाद बरनवाल ने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं में सरकारी कर्मचारियों का मुख्यालय पर मौजूद रहना अनिवार्य है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले की पूरी जानकारी उप विकास आयुक्त तक भेजी जाएगी। डॉ. श्रवण कुमार ने कहा कि लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ अधिक वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया जारी है।प्रशासन ने चेतावनी दी है कि ग्रामीणों को आवारा पशुओं से सावधानी बरतनी चाहिए और खाद्य सामग्री सुरक्षित रखने के लिए विशेष ध्यान देना होगा। स्वास्थ्य केंद्र में व्यवस्था सुधारने के लिए अतिरिक्त स्टाफ और संसाधनों की मांग की गई है, ताकि भविष्य में किसी भी स्थिति में लोगों को सुरक्षित और समय पर उपचार मिल सके।

 

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