अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद दुनिया भर की नजरें ऊर्जा बाजार पर टिकी हैं। इसी बीच भारत सरकार ने देश में पेट्रोल, डीजल और LPG की उपलब्धता को लेकर बड़ा बयान जारी किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि देश में किसी भी तरह की ईंधन कमी नहीं है और आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक, सभी रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार भी मौजूद है। सरकार ने स्पष्ट किया कि देशभर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।
कुछ पेट्रोल पंपों पर क्यों बढ़ी बिक्री?
पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि कुछ रिटेल आउटलेट्स पर ईंधन की मांग सामान्य से ज्यादा देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य कारण यह है कि कई औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता सीधे सप्लाई चैनल की बजाय पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रहे हैं। इससे कुछ जगहों पर बिक्री में अस्थायी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि इससे आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त इंतजाम भी किए जाएंगे।
US-ईरान समझौते से भारत को क्या फायदा होगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए एक समझौता तैयार हो गया है। दोनों देशों के बीच 19 जून को स्विट्जरलैंड में इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य होने की संभावना जताई जा रही है। भारत के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अगर क्षेत्र में स्थिरता लौटती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में कमी आ सकती है, जिससे भारत को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
ऊर्जा संकट से प्रभावित हुआ था व्यापार
पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव का असर भारत के व्यापार और अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिला था। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आयात खर्च बढ़ गया था और निर्यात पर भी असर पड़ा। हाल के महीनों में खाड़ी देशों के साथ व्यापार में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता सफल रहता है, तो भारत के निर्यात, विनिर्माण क्षेत्र और रुपये को मजबूती मिल सकती है। इसके अलावा शिपिंग लागत कम होने और ऊर्जा आपूर्ति बेहतर होने से आम लोगों को भी भविष्य में राहत मिल सकती है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी बदलाव को लेकर सरकार या तेल कंपनियों की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
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