लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने FCRA Amendment Bill 2026 की पड़ताल के लिए लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों वाली संयुक्त समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता बिहार से बीजेपी सांसद डॉ. संजय जायसवाल करेंगे। समिति को विधेयक के प्रावधानों पर विस्तार से विचार करने और इससे जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। खास बात यह है कि समिति में सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी दलों के सांसदों को भी शामिल किया गया है। इससे बिल पर होने वाली चर्चा में अलग-अलग राजनीतिक दलों की राय सामने आने की उम्मीद है।
लोकसभा से इन सांसदों को मिली जगह
संयुक्त समिति में लोकसभा के कई प्रमुख सांसदों को सदस्य बनाया गया है। बीजेपी की ओर से संजय जायसवाल के अलावा भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, कमलेश जांगड़े, मुकेशकुमार चंद्रकांत दलाल, निशिकांत दुबे, विष्णु दयाल राम, अनंत नायक और अरविंद धर्मपुरी शामिल हैं। कांग्रेस से एंटो एंटनी, कैप्टन विरियाटो फर्नांडीस, मुहम्मद हमदुल्ला सईद और काली चरण मुंडा को जगह मिली है। वहीं समाजवादी पार्टी से जिया उर रहमान, TMC से कल्याण बनर्जी, DMK से ए. राजा, TDP से लवू श्री कृष्ण देवरयालु, शिवसेना से नरेश गणपत म्हस्के और JD(U) से कौशलेन्द्र कुमार समिति का हिस्सा हैं। NCP-SP से सुप्रिया सुले और IUML से ई. टी. मोहम्मद बशीर भी सदस्य बनाए गए हैं।
राज्यसभा के सांसद भी समिति में शामिल
इस संयुक्त समिति में राज्यसभा से भी कई सांसदों को जिम्मेदारी दी गई है। इनमें सी. सदानंदन मास्टर, हर्षवर्धन श्रृंगला, उज्ज्वल देवराव निकम, डॉ. अलका गुर्जर, सत पॉल शर्मा, प्रफुल्ल पटेल, संजय कुमार झा, क्रिस्टोफर मणिकम, डॉ. मेनका गुरुस्वामी और पी. विल्सन शामिल हैं। इस तरह समिति में दोनों सदनों के सांसद मिलकर FCRA संशोधन विधेयक के प्रावधानों पर विचार करेंगे। समिति की चर्चा के दौरान विदेशी फंड से जुड़े नियमों और उनके संभावित असर जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से विचार किया जा सकता है।
क्या है FCRA और क्यों अहम है यह बिल?
FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act भारत में विदेश से मिलने वाले चंदे और दूसरे विदेशी योगदान को नियंत्रित करने वाला कानून है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी फंड का इस्तेमाल देश के हित, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के खिलाफ न हो। मौजूदा FCRA कानून 2010 में लागू हुआ था और इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय देखता है। NGO, ट्रस्ट और अन्य पात्र संस्थाओं को विदेशी चंदा हासिल करने के लिए नियमों के तहत पंजीकरण या अनुमति की जरूरत होती है। विदेशी धन मिलने के बाद उसके इस्तेमाल और हिसाब-किताब से जुड़ी जानकारी देना भी जरूरी होता है। अब 2026 के संशोधन विधेयक की संयुक्त समिति जांच करेगी, जिसके बाद इसकी आगे की संसदीय प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
Read More-अंकित बालियान के घर पहुंचे मासूम शर्मा-संजीव बालियान, परिवार को दिया बड़ा भरोसा
