दिल्ली (Delhi) में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि डर और दबाव के जरिए पढ़े-लिखे और अनुभवी लोग भी उनके जाल में फंस सकते हैं। ग्रेटर कैलाश इलाके में रहने वाले NRI डॉक्टर दंपति, डॉक्टर ओम तनेजा और उनकी पत्नी डॉक्टर इंदिरा तनेजा, इस हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी का शिकार बन गए। 24 दिसंबर को एक फोन कॉल से शुरू हुई यह कहानी 10 जनवरी तक चली, जिसमें साइबर ठगों ने खुद को जांच एजेंसियों से जुड़ा बताते हुए फर्जी मुकदमों और गिरफ्तारी वारंट का डर दिखाया। करीब 48 साल तक अमेरिका में रहकर UN जैसी संस्था में सेवा दे चुके डॉक्टर दंपति को बताया गया कि वे मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध लेनदेन के मामले में फंस चुके हैं। डर और भ्रम के इस जाल में फंसकर दोनों ने ठगों की हर बात माननी शुरू कर दी, जो आगे चलकर उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी ठगी साबित हुई।
वीडियो कॉल पर रखा ‘डिजिटल अरेस्ट’, हर हरकत पर थी नजर
साइबर ठगों ने खुद को कानून और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़ा बताकर डॉक्टर दंपति को तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ में डाल दिया। 24 दिसंबर से लेकर 10 जनवरी की सुबह तक दोनों को लगातार वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा गया। खासतौर पर डॉक्टर इंदिरा तनेजा पर पूरा फोकस था, क्योंकि बैंक से लेनदेन उन्हीं के जरिए किया जाना था। ठग यह सुनिश्चित करते थे कि जब भी इंदिरा तनेजा घर से बाहर जाएं या किसी से बात करें, तो डॉक्टर ओम तनेजा के फोन पर वीडियो कॉल चालू रहे। इससे ठगों को यह भरोसा रहता था कि इस ठगी की जानकारी किसी और तक नहीं पहुंच रही है। इस दौरान साइबर अपराधियों ने पीएमएलए, मनी लॉन्ड्रिंग कानून और नेशनल सिक्योरिटी जैसे बड़े शब्दों का इस्तेमाल कर डर का माहौल बनाए रखा, जिससे बुजुर्ग दंपति मानसिक रूप से पूरी तरह टूटते चले गए।
बैंकों तक पहुंचा पैसा, ठगों ने सिखाई झूठी कहानी
इस साइबर ठगी में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि करीब 14 करोड़ 85 लाख रुपये आठ अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराए गए। डॉक्टर इंदिरा तनेजा ने बताया कि कभी 2 करोड़, कभी 2 करोड़ 10 लाख रुपये जैसे अलग-अलग अमाउंट ट्रांसफर करने को कहा गया। जब वह पहली बार बैंक पहुंचीं और बैंक मैनेजर ने इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करने का कारण पूछा, तो उन्होंने वही कहानी दोहराई जो साइबर ठगों ने पहले से रटवा दी थी। हर बार बैंक जाने से पहले ठग उन्हें समझाते थे कि अगर कोई सवाल करे तो क्या जवाब देना है। डर और तथाकथित कानूनी कार्रवाई के नाम पर वह बिना सवाल किए सब करती रहीं। इस दौरान ठग लगातार भरोसा दिलाते रहे कि यह पैसा जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और बाद में आरबीआई के जरिए रिफंड कर दिया जाएगा।
थाने पहुंचते ही टूटा भ्रम, पुलिस ने शुरू की बड़ी जांच
10 जनवरी की सुबह साइबर ठगों ने डॉक्टर इंदिरा तनेजा को स्थानीय पुलिस स्टेशन जाने को कहा और दावा किया कि अब सारा पैसा उन्हें वापस मिल जाएगा। वह जब थाने पहुंचीं तो ठग वीडियो कॉल पर ही जुड़े रहे और SHO से भी बात कराई। यहीं पर ठगों का रवैया बदतमीज और आक्रामक बताया गया। पुलिस ने जब पूरे मामले की जानकारी ली, तब डॉक्टर दंपति को एहसास हुआ कि उनके साथ 14 करोड़ 85 लाख रुपये की बड़ी साइबर ठगी हो चुकी है। यह सच सामने आते ही दोनों गहरे सदमे में चले गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने केस को स्पेशल सेल की साइबर यूनिट IFSO को सौंप दिया है। पुलिस का कहना है कि यह ‘डिजिटल अरेस्ट’ का बेहद संगठित मामला है, जिसमें कई खातों और तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल किया गया। जांच जारी है और पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि किसी भी तरह की धमकी या संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
