मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। जयपुर में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने न सिर्फ गुरुकुल खोलने का ऐलान किया, बल्कि वेदों को लेकर ऐसा बयान दे दिया, जिसने धार्मिक और सामाजिक बहस को फिर हवा दे दी है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वे बागेश्वर धाम में एक गुरुकुल की स्थापना करेंगे, जहां बच्चों को वेदों, शास्त्रों और सनातन परंपरा की शिक्षा दी जाएगी। उन्होंने मंच से यह भी कहा कि अगर आने वाली पीढ़ी वेदों से दूर रही, तो उनके बच्चों की पहचान भी बदल जाएगी। उनके इस बयान को लेकर समर्थकों में उत्साह है, जबकि आलोचक इसे विवादित नजरिए से देख रहे हैं।
‘जावेद-नावेद’ वाले बयान ने क्यों मचाई हलचल
कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, “जो वेद नहीं मानेगा, उसके बच्चे भविष्य में जावेद और नावेद बन जाएंगे।” उनके इस कथन को कई लोग सांस्कृतिक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं, तो कई इसे भड़काऊ बयान बता रहे हैं। बाबा बागेश्वर का कहना था कि वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिशा देने वाले सूत्र हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि समाज अगर अपनी जड़ों से कटता है, तो उसकी पहचान धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। यही वजह है कि वे चाहते हैं कि बच्चे गुरुकुलों में पढ़ें, जहां उन्हें भारतीय संस्कृति, संस्कार और परंपरा की शिक्षा मिले। बयान के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
‘भोजन एक दिन, विद्या जीवन भर’ – शिक्षा पर जोर
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “भोजन एक दिन तक साथ देता है, पानी एक घंटे तक टिकता है, लेकिन विद्या जीवन भर साथ निभाती है।” उन्होंने साफ किया कि गुरुकुल का उद्देश्य किसी के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति को मजबूती देना है। बाबा के अनुसार, आज के दौर में बच्चे आधुनिक शिक्षा तो पा रहे हैं, लेकिन संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। गुरुकुल इसी दूरी को खत्म करने का माध्यम बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनका सपना है कि देश के हर कोने में गुरुकुल स्थापित हों, ताकि सनातनी बच्चे अपनी परंपरा से जुड़े रहें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।
समर्थक बोले ‘संस्कृति बचाने की पहल’, विरोधियों ने उठाए सवाल
धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान के बाद प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। उनके समर्थकों का कहना है कि बाबा भारतीय संस्कृति और वेदों की रक्षा की बात कर रहे हैं, जिसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। वहीं, विरोधियों का आरोप है कि ऐसे बयान समाज को बांट सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में भी इस बयान को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, धीरेंद्र शास्त्री पहले भी कई बार हिंदुत्व, सनातन धर्म और संस्कृति को लेकर मुखर बयान देते रहे हैं और हर बार उनके समर्थक बड़ी संख्या में उनके साथ खड़े नजर आए हैं। गुरुकुल की घोषणा के साथ एक बार फिर बागेश्वर धाम चर्चा के केंद्र में आ गया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
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