मध्य प्रदेश के गुना जिले से सामने आया यह मामला स्थानीय स्तर पर सत्ता के दुरुपयोग और दबंगई की एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश करता है। मधुसूदनगढ़ थाना क्षेत्र की जांगरू ग्राम पंचायत में सरकारी स्कूल के बाहर बनी क्रिकेट पिच पर बच्चे रोजाना खेलते थे। यह जमीन शासकीय बताई जा रही है, लेकिन इसी जमीन को लेकर पंचायत की महिला सरपंच रुक्मणी बाई धाकड़ के बेटे अर्जुन धाकड़ की नीयत टकरा गई। आरोप है कि अर्जुन ने ट्रैक्टर लेकर मैदान में एंट्री की और देखते ही देखते क्रिकेट पिच को जोतकर खेत जैसा बना दिया। इस दौरान वहां मौजूद बच्चों ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि ट्रैक्टर से उन्हें डराने और टक्कर मारने की भी कोशिश की गई। इस पूरी घटना का वीडियो किसी ग्रामीण ने बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और सरपंच पुत्र की दादागिरी को उजागर कर रहा है।
सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप
ग्रामीणों और क्रिकेट खेलने वाले बच्चों का कहना है कि जिस जगह पिच बनाई गई थी, वह पूरी तरह से सरकारी जमीन है और वर्षों से गांव के बच्चे वहां खेलते आ रहे हैं। आरोप लगाया गया कि सरपंच के बेटे ने इसी जमीन पर कब्जा करने की नीयत से ट्रैक्टर चलवाया, ताकि मैदान को खत्म कर निजी इस्तेमाल का रास्ता साफ किया जा सके। वीडियो वायरल होने के बाद गांव में नाराजगी फैल गई और लोग खुलकर इस कार्रवाई की आलोचना करने लगे। कई ग्रामीणों ने इसे खुलेआम ताकत का गलत इस्तेमाल बताया। वहीं सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब जमीन सरकारी है, तो किसी एक व्यक्ति को उसे अपने हिसाब से जोतने का अधिकार कैसे मिल गया। बच्चों के लिए बने खेल के मैदान को इस तरह उजाड़ देना गांव वालों को काफी खल गया और यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया।
वीडियो वायरल होते ही यू-टर्न और नई सफाई
जैसे ही मामला तूल पकड़ने लगा और वीडियो वायरल हुआ, सरपंच पुत्र अर्जुन धाकड़ ने अचानक यू-टर्न ले लिया। उसने खुद एक नया वीडियो जारी किया, जिसमें उसके समर्थक उसी जगह पर दोबारा क्रिकेट पिच बनाते नजर आए। वीडियो में पानी का टैंकर मंगवाया गया, गिट्टी-पत्थर डाले गए और जमीन को समतल किया जाता दिखाया गया। अर्जुन का कहना है कि उसका इरादा मैदान खराब करने का नहीं था, बल्कि वह क्रिकेट की पिच को “नंबर-1” बनाना चाहता था, इसलिए ट्रैक्टर से खुदाई करवाई गई थी। इस सफाई के बाद गांव में लोग चुटकी लेने लगे और तंज कसते नजर आए। कई ग्रामीणों का कहना है कि अगर मंशा अच्छी थी तो पहले बच्चों को हटाकर पंचायत के माध्यम से काम किया जा सकता था, ट्रैक्टर से मैदान जोतना किसी भी तरह से सुधार का तरीका नहीं कहा जा सकता।
पंचायत, पुलिस और प्रशासन की स्थिति
मामले को लेकर पंचायत सचिव नारायण लाल ने स्पष्ट किया कि जिस जमीन पर क्रिकेट खेला जाता है, वह शासकीय है और स्कूल परिसर से जुड़ी हुई है। उन्होंने माना कि मैदान के विकास को लेकर पंचायत में कोई लिखित प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था और केवल मौखिक रूप से 26 जनवरी को प्रस्तावित क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए तैयारी की जा रही थी। वहीं सरपंच के पति तेजसिंह धाकड़ ने बेटे का बचाव करते हुए कहा कि उसे बेवजह बदनाम किया जा रहा है और उसका उद्देश्य मैदान को बेहतर बनाना था। दूसरी ओर मधुसूदनगढ़ पुलिस का कहना है कि अब तक किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत नहीं मिली है, इसलिए कोई मामला दर्ज नहीं किया गया। हालांकि यह घटना गांव में एक बड़ा सवाल छोड़ गई है—क्या जनप्रतिनिधियों के परिवारों को सरकारी जमीन पर मनमानी करने की छूट है? वायरल वीडियो ने यह बहस जरूर छेड़ दी है कि सत्ता और जिम्मेदारी के बीच की रेखा कितनी आसानी से लांघी जा सकती है।
