देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा National Testing Agency द्वारा आयोजित NEET UG री-एग्जाम को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि परीक्षा केंद्रों पर धार्मिक प्रतीकों को लेकर अलग-अलग नियम अपनाए गए। मामला 21 जून को हुए री-एग्जाम के बाद सामने आया, जिसमें 20 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। आरोपों के अनुसार कुछ परीक्षा केंद्रों पर हिंदू अभ्यर्थियों को कलावा और माला जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि कुछ मुस्लिम अभ्यर्थियों को हिजाब और बुर्का पहनकर परीक्षा देने की इजाजत मिली। इसी दावे ने अब एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या परीक्षा नियम सभी के लिए समान थे या नहीं।
VHP का दावा: धार्मिक प्रतीकों पर पाबंदी से आहत हुई भावनाएं
Vishva Hindu Parishad ने इस पूरे मामले पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि परीक्षा के दौरान कथित तौर पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया गया। संगठन का कहना है कि यदि एक समुदाय के धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई गई, तो दूसरे समुदाय को विशेष छूट कैसे दी गई। संगठन ने इसे समानता के सिद्धांत के खिलाफ बताया है। इस मुद्दे को लेकर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। VHP ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जाएगी, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
विनोद बंसल का बयान: ‘समान नियम क्यों नहीं लागू हुए?’
VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता Vinod Bansal ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाए हैं कि क्या परीक्षा केंद्रों पर ड्रेस कोड को लेकर अलग-अलग नियम लागू किए गए थे। उन्होंने कहा कि यदि एक तरफ कलावा और माला जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई गई, तो दूसरी तरफ बुर्का या हिजाब को अनुमति क्यों दी गई। बंसल ने इसे संभावित भेदभाव का मामला बताते हुए National Testing Agency से पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का असमान व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पारदर्शिता और ड्रेस कोड पर जवाब की मांग
विवाद बढ़ने के बाद अब परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। कई अभ्यर्थियों और संगठनों ने मांग की है कि परीक्षा केंद्रों पर लागू ड्रेस कोड और नियमों को सार्वजनिक किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि धार्मिक प्रतीकों को लेकर क्या नीति अपनाई गई थी। दूसरी ओर, विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा में सुरक्षा और पहचान सत्यापन के लिए ड्रेस कोड लागू किया जाता है, लेकिन उसे सभी पर समान रूप से लागू करना जरूरी है। फिलहाल National Testing Agency पर इस विवाद को लेकर जवाब देने का दबाव बढ़ता जा रहा है और मामला अब जांच की मांग तक पहुंच चुका है।
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