CJP Protest Case की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में हुई चर्चा के बाद आंदोलन को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने अदालत में कहा कि संगठन 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च का आह्वान वापस ले रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और मामले में शामिल वकीलों का आभार भी जताया। यह फैसला केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIR को लेकर अदालत में दिए गए रुख के बाद सामने आया है।
केंद्र ने 13 FIR रद्द करने की मांग की
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन से जुड़ी 13 FIR को रद्द करने का अनुरोध किया जा रहा है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी विशेष संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल करने की मांग की। सरकार के अनुसार, गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों के खिलाफ नई FIR की कार्रवाई अलग से की जाएगी। दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र, बिहार, असम और पश्चिम बंगाल की ओर से भी FIR से संबंधित आवेदन दाखिल किए जाने की जानकारी अदालत को दी गई।
मुआवजे पर सरकार ने मांगा तीन महीने का समय
सुनवाई के दौरान छात्रों को मुआवजा देने का मुद्दा भी उठा। वरिष्ठ वकील हरिहरन ने मुआवजे के लिए पात्र छात्रों की पहचान करने के लिए एक पोर्टल बनाने का सुझाव दिया। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार सभी पक्षों से बातचीत कर रही है और मामले को ज्यादा जटिल नहीं बनाया जाना चाहिए। सरकार ने अदालत से फिलहाल मुआवजे को लेकर कोई आदेश जारी नहीं करने और उसे तीन महीने का समय देने का अनुरोध किया। सरकार ने कहा कि छात्रों से किए गए वादे के आधार पर मुआवजे का फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है।
CJP ने केंद्र के कदम पर जताई संतुष्टि
सौरव दास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि अन्य राज्यों की सरकारें भी प्रदर्शनकारियों और छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को खत्म करने के लिए अदालत का रुख करेंगी। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और महाराष्ट्र की ओर से आवेदन दाखिल किए गए हैं। CJP ने इसी घटनाक्रम के बाद 5 सितंबर के मार्च को वापस लेने का ऐलान किया। अब मामले में आगे की सुनवाई के दौरान FIR और मुआवजे से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर रहेगी।
