उत्तर प्रदेश के गजरौला क्षेत्र के बसैली, शहबाजपुर डोर और नाईपुरा मुहल्ले में हैंडपंप का पानी पीला और दुर्गंधयुक्त निकल रहा है। लगभग 10 हजार की आबादी इस पानी का उपयोग पीने, खाना बनाने और अन्य घरेलू कामों के लिए कर रही है। पिछले चार वर्षों से यह समस्या बनी हुई है और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मवेशियों में भी बीमारियों की आशंका बढ़ गई है और खेतों की उर्वरक शक्ति भी प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का आरोप: औद्योगिक रसायन हैं जिम्मेदार
स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि पास की औद्योगिक इकाइयों द्वारा भूगर्भ में छोड़ा गया केमिकल युक्त पानी इस समस्या का मुख्य कारण है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण उनकी जीवनशैली प्रभावित हो रही है। किसान और स्थानीय समुदाय लगातार अपनी आवाज़ उठा रहे हैं, लेकिन हाल तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोग अब भी इसी प्रदूषित जल का उपयोग करने को मजबूर हैं।
जांच रिपोर्ट पर क्यों है विलंब?
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित विभागों ने प्रभावित गांवों से जल और मिट्टी के नमूने लिए थे। हालांकि, 15 दिन बीतने के बावजूद अब तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है। विलंब से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है और स्वास्थ्य जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रशासन ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही उच्चाधिकारियों को सूचित किया जाएगा और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
प्रशासन की स्थिति और ग्रामीणों की मजबूरी
गजरौला क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि “पानी और मिट्टी के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है। हालात पर निगरानी रखी जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद उच्चाधिकारियों को सूचित कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।” वहीं, ग्रामीण अपनी दैनिक जरूरतों के लिए इसी प्रदूषित पानी का उपयोग कर रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहा है।
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