बांग्लादेश की राजनीति और छात्र आंदोलनों से जुड़ा एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। चर्चित छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद पूरे देश में गुस्से और शोक का माहौल बन गया है। गुरुवार (18 दिसंबर 2025) को सिंगापुर में इलाज के दौरान उसकी मौत की पुष्टि होते ही ढाका, नारायणगंज, चटगांव और राजशाही जैसे शहरों में तनाव बढ़ गया। कई जगह छात्र संगठनों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन शुरू कर दिए, वहीं कुछ इलाकों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं। हादी की मौत को उसके समर्थक एक “राजनीतिक साजिश” बता रहे हैं, जबकि प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटा हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों को राजधानी ढाका में हाई अलर्ट पर रखा गया है, क्योंकि आशंका जताई जा रही है कि हालात और बिगड़ सकते हैं।
सिंगापुर में इलाज के दौरान तोड़ा दम
सिंगापुर सरकार की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, शरीफ उस्मान हादी को 15 दिसंबर 2025 को गंभीर हालत में सिंगापुर एयरलिफ्ट किया गया था। उसे Singapore General Hospital की न्यूरोसर्जिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां नेशनल न्यूरोसाइंस इंस्टीट्यूट से जुड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसका इलाज कर रही थी। डॉक्टरों के अनुसार, सिर में गोली लगने से उसके मस्तिष्क को गहरी क्षति पहुंची थी। तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका और आखिरकार 18 दिसंबर को उसने दम तोड़ दिया। इस खबर के सामने आते ही बांग्लादेशी मीडिया में यह मुद्दा छा गया और सोशल मीडिया पर #OsmanHadi ट्रेंड करने लगा। सरकार ने हादी की मौत पर औपचारिक शोक व्यक्त किया, लेकिन साथ ही हिंसा न फैलाने की अपील भी की।
कौन था शरीफ उस्मान हादी
शरीफ उस्मान हादी बांग्लादेश के चर्चित छात्र संगठन ‘इंकलाब मंच’ का प्रमुख चेहरा और प्रवक्ता था। वर्ष 2024 में हुए छात्र विद्रोह के दौरान उसका नाम राष्ट्रीय स्तर पर उभरा, जब इस संगठन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे। हादी का जन्म बांग्लादेश के झलकाठी जिले में हुआ था। उसका परिवार साधारण और धार्मिक पृष्ठभूमि से आता था। उसके पिता एक मदरसा शिक्षक थे, जिन्होंने उसे अनुशासन, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया। हादी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नेसराबाद कामिल मदरसा से पूरी की और बाद में ढाका में पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में सक्रिय हो गया। वह आगामी फरवरी चुनाव में ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर प्रचार कर रहा था, जिससे उसकी लोकप्रियता और राजनीतिक महत्व दोनों बढ़ गए थे।
ढाका में दिनदहाड़े हमला और उसके बाद भड़की हिंसा
शरीफ उस्मान हादी पर हमला 12 दिसंबर 2025 को ढाका के पलटन इलाके में हुआ था। वह कल्वरट रोड से ऑटो रिक्शा में जा रहा था, तभी अज्ञात हमलावरों ने उस पर गोली चला दी। गोली सीधे उसके सिर में लगी, जिससे वह मौके पर ही गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, बाद में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत नाजुक बनी रही। इसके बाद डॉक्टरों की सलाह पर उसे सिंगापुर भेजा गया। अब उसकी मौत के बाद बांग्लादेश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन देखे जा रहे हैं। ढाका विश्वविद्यालय के आसपास, नारायणगंज और चटगांव में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम कर दिया है। कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की खबरें भी आई हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन हादी की मौत ने बांग्लादेश की राजनीति और छात्र आंदोलनों को एक बार फिर उबाल पर ला दिया है।
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