न्यू ईयर का जश्न मनाने की तैयारियों में जुटे शहरों के लोगों के लिए एक बड़ी चिंता सामने आ गई है। जिन ऐप्स पर भरोसा करके लोग खाना, किराना और दवाइयां मिनटों में मंगवाते हैं, वही सेवाएं नए साल के मौके पर ठप पड़ सकती हैं। जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और जेप्टो जैसे बड़े डिलीवरी प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स ने न्यू ईयर पर भी हड़ताल का आह्वान किया है। इससे पहले क्रिसमस के दिन भी कई शहरों में डिलीवरी सेवाएं प्रभावित हुई थीं। अब न्यू ईयर की रात पार्टी, गेट-टुगेदर और घरेलू आयोजनों के बीच अगर डिलीवरी नहीं हुई, तो लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। खासकर वे लोग जो आखिरी समय में फूड ऑर्डर या ग्रॉसरी मंगवाने की योजना बनाते हैं, उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
25 दिसंबर की हड़ताल से पहले ही मिल चुके संकेत
गिग वर्कर्स की नाराजगी कोई नई नहीं है। 25 दिसंबर को देश के कई हिस्सों में स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और जेप्टो के डिलीवरी एजेंट्स ने हड़ताल की थी। उस दिन कई ग्राहकों को ऑर्डर कैंसिल होने, देर से डिलीवरी या बिल्कुल भी डिलीवरी न मिलने की शिकायतें झेलनी पड़ी थीं। वर्कर्स का कहना है कि वे लंबे समय से कंपनियों से संवाद की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। खासतौर पर 7 से 10 मिनट में डिलीवरी के मॉडल को लेकर गिग वर्कर्स में भारी असंतोष है। उनका कहना है कि इस तेज डिलीवरी के दबाव में उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है और सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है। न्यू ईयर पर बढ़ने वाले ऑर्डर इस दबाव को और भी खतरनाक बना सकते हैं।
गिग वर्कर्स की 10 बड़ी मांगें क्या हैं
हड़ताल पर जा रहे गिग वर्कर्स ने कंपनियों और सरकार के सामने अपनी कई अहम मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग है कि 10 मिनट में डिलीवरी वाले मॉडल को तुरंत खत्म किया जाए। उनका कहना है कि इस मॉडल के कारण उन्हें तेज रफ्तार में वाहन चलाने के लिए मजबूर किया जाता है। इसके अलावा वर्कर्स न्यूनतम प्रति ऑर्डर तय भुगतान, पारदर्शी इंसेंटिव सिस्टम, ईंधन और मेंटेनेंस भत्ता, बीमा कवर, दुर्घटना की स्थिति में मुआवजा और काम के घंटों की स्पष्ट सीमा की मांग कर रहे हैं। वे यह भी चाहते हैं कि बिना वजह आईडी ब्लॉक न की जाए और किसी कार्रवाई से पहले उन्हें अपनी बात रखने का मौका मिले। गिग वर्कर्स का कहना है कि वे कंपनियों की रीढ़ हैं, लेकिन उनके अधिकारों और सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है।
ग्राहकों और कंपनियों के लिए क्यों अहम है यह हड़ताल
यह हड़ताल सिर्फ गिग वर्कर्स और कंपनियों के बीच का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ने वाला है। न्यू ईयर के मौके पर डिलीवरी ऐप्स पर ऑर्डर की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में अगर बड़े पैमाने पर डिलीवरी एजेंट्स काम से दूर रहते हैं, तो सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। कंपनियों के लिए यह समय सबसे ज्यादा कमाई का होता है, लेकिन हड़ताल से उनकी साख और बिजनेस दोनों पर असर पड़ सकता है। वहीं, गिग वर्कर्स का कहना है कि अगर अभी उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो भविष्य में हालात और खराब होंगे। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि न्यू ईयर से पहले कंपनियां और सरकार कोई समाधान निकाल पाती हैं या फिर नए साल की रात लोगों को बिना ‘फटाफट डिलीवरी’ के ही जश्न मनाना पड़ेगा।
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