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योगी सरकार का बड़ा फैसला: शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का बढ़ाया वेतन, लाखों को राहत

यूपी सरकार ने शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी की है। शिक्षामित्रों को अब 18,000 रुपये और अंशकालिक शिक्षकों को 17,000 रुपये मासिक मिलेगा।

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उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों और अंशकालिक शिक्षकों के लिए खुशखबरी आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षामित्रों के मानदेय को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव मंजूर कर दिया गया। वहीं, अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय 9,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी अप्रैल माह से प्रभावी होगी, यानी शिक्षकों के खाते में बढ़ी हुई सैलरी मई महीने में जमा होना शुरू हो जाएगी। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव के साथ ही प्रदेश के मदरसों में शिक्षक भर्ती परीक्षा आयोग के माध्यम से कराने का भी निर्णय लिया।

पूर्व की तुलना और वृद्धि का इतिहास

शिक्षामित्रों के मानदेय में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। 2017 में योगी सरकार बनने के बाद शिक्षामित्रों का मासिक मानदेय 3,500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया था। अब इसे 18,000 रुपये कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार ने हमेशा शिक्षकों और शिक्षामित्रों के हित में फैसले लिए हैं और उनकी मेहनत और सेवा को मान्यता देने के लिए यह बढ़ोतरी समय की मांग थी। अनुदेशकों का मानदेय भी 9,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये किया गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।

कब से मिलेगा नया मानदेय और प्रक्रिया

मंत्री संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि अप्रैल माह से यह बढ़ा हुआ मानदेय प्रभावी होगा। शिक्षकों और शिक्षामित्रों को उनके बैंक खातों में यह राशि 1 मई से जमा होने लगेगी। बैठक में कुल 22 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें शिक्षकों के अलावा प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए भी निर्णय लिए गए। इस नई सैलरी नीति के लागू होने के बाद शिक्षामित्रों और अंशकालिक शिक्षकों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और शिक्षा क्षेत्र में स्थिरता आएगी।

सरकार की नीति और भविष्य की तैयारी

योगी सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने और शिक्षकों की सेवा को सम्मान देने के लिए लगातार कदम उठाए हैं। बढ़ी हुई सैलरी से न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी मिल सकेगी। प्रदेश सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो, ताकि योग्य शिक्षक ही बच्चों की शिक्षा में योगदान दे सकें। इस कदम से उत्तर प्रदेश में शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने की दिशा में मजबूत संकेत मिले हैं।

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