बेंगलुरु से गुरुवार को एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई, जिसने कारोबारी जगत को हिला कर रख दिया। शहर की जानी-मानी रियल एस्टेट कंपनी कॉन्फिडेंट ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सी.जे. रॉय ने अपने ही घर में आत्महत्या कर ली। यह घटना उस समय हुई, जब आयकर विभाग की टीम उनके ग्रुप से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी। जानकारी के अनुसार, आयकर अधिकारी सुबह से ही रिचमंड रोड स्थित कॉन्फिडेंट ग्रुप के कार्यालय में जांच कर रहे थे। इसी दौरान अनेपल्या इलाके में स्थित डॉ. रॉय के घर से उनके निधन की सूचना मिली। खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई। इस घटना से बेंगलुरु के कारोबारी हलकों में हड़कंप मच गया।
छापेमारी के बाद बढ़ा तनाव, जांच में जुटी पुलिस
आयकर विभाग ने गुरुवार सुबह डॉ. सी.जे. रॉय और उनसे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ छापेमारी की थी। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई उनकी आय और संपत्ति से जुड़े मामलों को लेकर की गई थी। छापेमारी के दौरान कई दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही थी। पुलिस के मुताबिक, डॉ. रॉय पिछले कुछ समय से लगातार चल रही आयकर जांच और छापेमारी के कारण मानसिक तनाव में थे। यह मामला अशोक नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आत्महत्या के कारणों की हर पहलू से जांच की जा रही है। फिलहाल किसी सुसाइड नोट की पुष्टि नहीं हुई है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।
कौन थे डॉ. सी.जे. रॉय, कैसे बनाई कारोबारी पहचान
डॉ. सी.जे. रॉय को बेंगलुरु के रियल एस्टेट सेक्टर में एक सफल और अनुभवी कारोबारी के रूप में जाना जाता था। उन्होंने साल 2005 में कॉन्फिडेंट ग्रुप की शुरुआत की थी। इसके बाद कंपनी ने रिहायशी अपार्टमेंट, विला, कमर्शियल बिल्डिंग और मिक्स्ड-यूज प्रोजेक्ट्स के क्षेत्र में कई बड़े काम किए। बीते करीब 20 सालों में कॉन्फिडेंट ग्रुप ने कर्नाटक ही नहीं, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में भी अपनी पहचान बनाई। डॉ. रॉय कंपनी के कामकाज में सक्रिय भूमिका निभाते थे और उन्हें एक मेहनती, अनुशासित और आगे की सोच रखने वाला बिजनेसमैन माना जाता था। उनके नेतृत्व में कंपनी ने कई लोगों को रोजगार भी दिया।
शोक का माहौल और मानसिक दबाव पर उठे सवाल
डॉ. सी.जे. रॉय के निधन की खबर फैलते ही कॉन्फिडेंट ग्रुप के कर्मचारियों और कारोबारी सहयोगियों में शोक की लहर दौड़ गई। कंपनी के दफ्तरों में कर्मचारी गमगीन नजर आए। रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े कई लोगों ने उन्हें एक शांत और समझदार लीडर के रूप में याद किया। हालांकि अभी तक आत्महत्या के पीछे की सही वजह सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटना ने बड़े कारोबारियों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को लेकर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है। लगातार जांच, कानूनी कार्रवाई और सार्वजनिक दबाव कई बार व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर गहरा असर डालते हैं। फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हैं और आने वाले दिनों में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
