गणतंत्र दिवस का दिन पूरे देश में उत्साह, एकता और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है, लेकिन बिहार के जहानाबाद जिले के गोनवां पंचायत में यह दिन हिंसा और अफरा-तफरी में बदल गया। सदर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले गोनवां गांव में 26 जनवरी को पंचायत सरकार भवन परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। पंचायत के मुखिया अमरनाथ सिंह अपने समर्थकों के साथ चार गाड़ियों के काफिले में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। निर्धारित समय पर झंडोत्तोलन हुआ, राष्ट्रगान गाया गया और इसके बाद परंपरा के अनुसार बच्चों और ग्रामीणों के बीच राष्ट्रीय मिठाई के रूप में जलेबी बांटने की तैयारी शुरू हुई। शुरुआत में माहौल सामान्य और उत्सवपूर्ण था, लेकिन जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, वैसे-वैसे जलेबी कम पड़ने लगी। मिठाई पाने के लिए बच्चों में होड़ मच गई और इसी दौरान विवाद ने जन्म ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब जलेबी खत्म होने लगी तो कुछ बच्चों ने दोबारा मांग की, जिस पर मुखिया पक्ष के लोगों ने आपा खो दिया।
बच्चों की पिटाई से भड़की ग्रामीणों की नाराजगी
विवाद उस समय गंभीर हो गया जब आरोप है कि मुखिया और उनके समर्थकों ने जलेबी कम पड़ने का गुस्सा बच्चों पर उतार दिया। बच्चों को डांटने से शुरू हुआ मामला कथित तौर पर मारपीट तक पहुंच गया। बच्चों की पिटाई देखकर आसपास खड़े ग्रामीण भड़क उठे। ग्रामीणों का कहना है कि राष्ट्रीय पर्व के मौके पर बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार असहनीय था। देखते ही देखते लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई और मुखिया पक्ष से जवाब-तलब होने लगा। कहासुनी बढ़ी और बात हाथापाई तक पहुंच गई। कुछ ही देर में लाठी-डंडे चलने लगे और पथराव शुरू हो गया। अफरा-तफरी के माहौल में चार लोगों के घायल होने की सूचना है, जिनमें कुछ को सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। हिंसा के दौरान कार्यक्रम स्थल के पास खड़ी तीन गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा, जिनके शीशे टूट गए और बॉडी को क्षति पहुंची। पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया।
पंचायत भवन में छिपे मुखिया, पुलिस ने निकाला सुरक्षित
हंगामा बढ़ता देख मुखिया अमरनाथ सिंह और उनके समर्थक जान बचाने के लिए पंचायत सरकार भवन के अंदर घुस गए और दरवाजे बंद कर लिए। ग्रामीणों का गुस्सा इतना बढ़ चुका था कि स्थिति बेकाबू होने लगी। सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने पहले भीड़ को शांत करने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित लोग मुखिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने हालात पर काबू पाया और मुखिया व उनके समर्थकों को सुरक्षित तरीके से पंचायत भवन से बाहर निकालकर उनके घर तक पहुंचाया। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया ताकि दोबारा कोई हिंसक घटना न हो। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ की और स्थिति की जानकारी ली। घटना के बाद गांव में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे और तनाव दोबारा न भड़के।
जांच में जुटी पुलिस, गांव में पसरा तनाव
घटना के बाद प्रशासन और पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी की ओर से औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज होने की प्रक्रिया चल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि मुखिया और उनके समर्थकों ने सत्ता के बल पर बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया, जबकि मुखिया पक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है कि भीड़ ने अचानक हिंसक रूप ले लिया, जिससे हालात बिगड़ गए। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि राष्ट्रीय पर्व जैसे पवित्र अवसरों पर छोटी-सी लापरवाही कैसे बड़े विवाद और हिंसा का कारण बन सकती है। गांव में अब भी तनाव का माहौल है, हालांकि स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। प्रशासन की नजर पूरे मामले पर बनी हुई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
