कनाडा की राजधानी ओटावा इस समय सर्दी और बर्फबारी से ढकी हुई है, लेकिन इसके बावजूद यहां राजनीति और उग्र विचारधारा का तापमान अचानक बढ़ गया। शहर में खालिस्तानी समर्थकों द्वारा फिर से एक अनऑफिशियल ‘खालिस्तान रेफरेंडम’ आयोजित किया गया, जिसमें कुछ लोगों ने भारतीय तिरंगे का सार्वजनिक अपमान किया। इस दौरान माहौल उस समय और खराब हो गया जब भीड़ में मौजूद कुछ तत्वों ने भारत विरोधी और हिंसा भड़काने वाले नारे लगाए।
इन लोगों की हरकतें दिखाती हैं कि भारत के खिलाफ उनके उकसावे की मुहिम लगातार जारी है। जबकि कनाडाई प्रशासन कई बार ऐसे कार्यक्रमों को लेकर चिंता जता चुका है, फिर भी इन्हें आयोजित करने का सिलसिला रुक नहीं रहा है।
‘इन्हें मार डालो…’ जैसे नारे, कार्यक्रम में बढ़ा तनाव
घटना के दौरान कुछ समर्थकों ने भड़काऊ शब्दों का इस्तेमाल करते हुए खुलेआम हिंसा को बढ़ावा देने वाले नारे लगाए, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया। ‘इन्हें मार डालो…’ जैसे बोल सुनकर कई स्थानीय लोग भी दंग रह गए कि कनाडा जैसे शांत देश में इस तरह की गतिविधियाँ कैसे हो रही हैं।
विशेष बात यह रही कि इस पूरे आयोजन का संचालन ‘सिख फॉर जस्टिस’ नामक संगठन के समर्थकों ने किया। यह वही संगठन है जिसे भारत सरकार पहले ही गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के कारण प्रतिबंधित कर चुकी है। फिर भी, कुछ देशों में इस संगठन की गतिविधियाँ समय-समय पर सामने आती रहती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की संप्रभुता और सुरक्षा के मुद्दों को केंद्र में ला देती हैं।
भारतीय झंडे का अपमान
बर्फबारी और माइनस तापमान में जमा हुए समर्थकों ने जिस तरह भारतीय तिरंगे का अपमान किया, उसने भारतीय समुदाय और प्रवासी भारतीयों में आक्रोष फैला दिया है। तिरंगा केवल एक राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि सम्मान, गर्व और देश की पहचान का प्रतीक है। उसका अपमान न केवल भारत के लिए बल्कि विश्वभर में रहने वाले भारतीयों के लिए भावनात्मक रूप से चोट पहुँचाने वाला है।
यह पहली बार नहीं है जब खालिस्तानी विचारधारा से जुड़े लोगों ने विदेश में ऐसी हरकतें की हों। पिछले कुछ वर्षों में ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अब कनाडा में इस तरह की घटनाएँ बढ़ी हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि विदेशों में सक्रिय इन समूहों की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन और भारतीय एजेंसियों के बीच और अधिक सहयोग की जरूरत है।
भारत का रुख और कनाडा में बढ़ती विवादित घटनाएँ
भारत का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है: अलगाववादी विचारधाराओं को किसी भी स्थिति में प्रोत्साहन नहीं दिया जा सकता। भारतीय सरकार पहले ही कनाडाई अधिकारियों के सामने खालिस्तानी संगठनों की गतिविधियों पर कड़ी आपत्ति दर्ज करा चुकी है। लेकिन ओटावा में हुई ताजा घटना से यह सवाल फिर उठ गया है कि आखिर इन भड़काऊ कार्यक्रमों को अनुमति कैसे मिल जाती है।
कनाडा में रहने वाले भारतीयों का कहना है कि ऐसे आयोजन न केवल शांति भंग करते हैं, बल्कि भारत-कनाडा संबंधों में भी अनावश्यक तनाव पैदा करते हैं। स्थानीय भारतीय समुदाय ने मांग की है कि कनाडाई सरकार को इन असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न दोहराई जाएँ।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि खालिस्तानी समर्थक भारत के खिलाफ माहौल बनाने की अपनी कोशिशें छोड़ने को तैयार नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसे कृत्य न केवल गलत संदेश देते हैं, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों के बीच अनावश्यक विवाद भी पैदा करते हैं।
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