देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े जनांदोलन का गवाह बना, जहां बीते कई दिनों से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले युवा और छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। हालांकि, सोमवार को यह प्रदर्शन अचानक उग्र रूप ले बैठा जब सैकड़ों की संख्या में मौजूद समर्थकों ने संसद भवन की ओर मार्च करने का फैसला किया। जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ना शुरू किया, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बैरिकेडिंग लगानी पड़ी। हालात तब और बिगड़ गए जब पुलिस और युवाओं के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े और फिर लाठीचार्ज कर दिया। इस अचानक हुई पुलिसिया कार्रवाई में कई छात्र-छात्राएं बुरी तरह घायल हो गए। वहीं दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के मुताबिक इस पूरे बवाल और धक्का-मुक्की में करीब 118 सुरक्षाकर्मियों को भी चोटें आई हैं।
लाठीचार्ज के अगले ही दिन मांगी माफी: “मैं आपको अमानवीय कार्रवाई से नहीं बचा सका”
घटना के अगले ही दिन मंगलवार (21 जुलाई) को इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आया, जब CJP के प्रमुख चेहरे अभिजीत दीपके ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक भावुक और सीधा पोस्ट साझा किया। लाठीचार्ज के बाद अपने समर्थकों के दर्द को देखते हुए उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। दीपके ने विशेष रूप से उन युवा छात्राओं का जिक्र किया, जिन पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस का बल प्रयोग हुआ था। उन्होंने अपनी विफलता स्वीकार करते हुए लिखा, “हम इससे कहीं बेहतर कर सकते थे। मैं आपको दिल्ली पुलिस की इस अमानवीय कार्रवाई से सुरक्षित रखने के लिए और अधिक प्रयास कर सकता था।” उन्होंने आगे कहा कि संगठन को अपने कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए और अधिक ठोस इंतजाम करने चाहिए थे। अपनी इस पोस्ट के साथ उन्होंने एक बड़ा कदम उठाते हुए सीधे सभी घायलों से संपर्क साधने की पहल की।
घायलों के लिए सीधे मैसेज का दरवाजा: केंद्र सरकार और धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा हमला
अभिजीत दीपके ने अपने इस बयान में केवल अपनी गलतियों को स्वीकार ही नहीं किया, बल्कि केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी बेहद तीखे हमले बोले। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की जायज मांगों को सुनने के बजाय पुलिस के बल पर आवाज दबाने का काम कर रही है। दीपके ने अपने पोस्ट में गंभीर दावा करते हुए कहा कि 20 से ज्यादा छात्रों की मौत के लिए जिम्मेदार व्यवस्था और शिक्षा मंत्री को बचाने के लिए सरकार मासूम छात्रों का खून बहाने पर आमादा है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदर्शन में चोटिल हुए हर एक छात्र और समर्थक से अपील की कि वे सीधे उन्हें पर्सनल मैसेज भेजें। उन्होंने वादा किया कि वह घायल युवाओं से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे, उनका हाल-चाल जानेंगे और उन्हें हर संभव मदद मुहैया कराएंगे।
आर-पार के मूड में युवा: क्या थम जाएगी यह जंग या आगे होगा बड़ा आंदोलन?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब दिल्ली का राजनीतिक और सामाजिक पारा पूरी तरह चढ़ा हुआ है। अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया है कि पुलिस की इस बर्बरता और लाठीचार्ज के बावजूद युवाओं का यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। उन्होंने अपने बयान के अंत में दोहराया कि छात्रों के अधिकारों और न्याय के लिए शुरू हुई यह लड़ाई किसी भी कीमत पर जारी रहेगी। दूसरी तरफ, छात्रों पर हुए इस बल प्रयोग को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक आम लोगों में भी भारी रोष देखा जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इस बढ़ते विरोध प्रदर्शन और युवाओं की नाराजगी से निपटने के लिए क्या रुख अपनाती है। क्या बातचीत का रास्ता निकाला जाएगा या यह जंग आने वाले दिनों में और अधिक आक्रामक रूप अख्तियार करेगी, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
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