मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल तथा ईरान के बीच जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है. कई देशों में तेल और गैस की कीमतों को लेकर अस्थिरता देखी जा रही है. इसी बीच भारत सरकार ने स्थिति को देखते हुए अपनी ऊर्जा आपूर्ति की रणनीति में अहम बदलाव किए हैं. मंगलवार (10 मार्च) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में सरकार ने साफ संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद देश में तेल और गैस की कमी नहीं होने दी जाएगी.
मंत्रियों को पीएम मोदी का खास संदेश
कैबिनेट मीटिंग के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिया कि वे जनता के बीच जाकर भरोसा बनाए रखें. उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भले ही अस्थिरता हो, लेकिन भारत के पास ऊर्जा संसाधनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि तेल की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं और सरकार लगातार हालात पर नजर रख रही है. मंत्रियों से कहा गया है कि वे लोगों को यह जानकारी दें कि सरकार ने पहले से ही आपूर्ति प्रबंधन के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार कर रखी है.
तेल और गैस सप्लाई के लिए नई रणनीति
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत ने कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर अपनी रणनीति में कुछ बदलाव किए हैं. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर घरेलू बाजार पर न पड़े. सरकार ने खासतौर पर एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता देने का फैसला किया है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं और व्यावसायिक उपयोग दोनों में कोई बाधा न आए. इसके अलावा सप्लाई चेन मैनेजमेंट सिस्टम को भी और मजबूत किया जा रहा है, जिससे जरूरत पड़ने पर तेजी से वितरण किया जा सके.
रेस्टोरेंट और व्यापारियों की चिंता पर भी ध्यान
सरकार ने रेस्टोरेंट और फूड बिजनेस से जुड़े कारोबारियों की दिक्कतों को भी गंभीरता से लिया है. कैबिनेट बैठक के बाद ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रेस्टोरेंट एसोसिएशन और बड़े उपभोक्ताओं से सीधे संवाद करें. इससे किसी भी तरह की सप्लाई समस्या को समय रहते हल किया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि अगर सप्लाई चेन मजबूत रहेगी तो वैश्विक तनाव के बावजूद देश में ऊर्जा संकट जैसी स्थिति नहीं बनेगी.
