ब्रिटेन के वारविकशायर में एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने पूरे समुदाय को हिला दिया। लेमिंगटन स्पा इलाके में एक 15 साल की किशोरी के साथ दो युवकों द्वारा की गई दरिंदगी ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ अदालत को भी झकझोर दिया। जानकारी के अनुसार, लड़की शाम के समय अपने कुछ दोस्तों के साथ पार्क में मौजूद थी। माहौल सामान्य था और किसी को अंदेशा नहीं था कि कुछ देर में क्या होने वाला है।
इसी दौरान पार्क के पास मौजूद दो युवक लड़की के आसपास मंडराते नजर आए। मौका पाकर दोनों ने किशोरी को पकड़ लिया और जबरन पार्क के एक सुनसान हिस्से की ओर घसीट ले गए। इस जगह पर रोशनी भी कम थी और आवाजें भी आसानी से किसी तक नहीं पहुंच सकती थीं। लड़की के विरोध करने पर दोनों युवक और आक्रामक हो गए, जिसके बाद उसकी चीखें और मदद की पुकारें भी किसी ने नहीं सुनीं।
पीड़िता की दर्द भरी चीखें, लेकिन कोई नहीं आया मदद को
घटना के बाद सामने आए मोबाइल फुटेज ने पूरे मामले को और भी भयावह बना दिया। लड़की ने बेहद डरी हुई हालत में कुछ क्षणों का वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें वह लगातार रोते हुए कहती सुनाई देती है— “कृपया मुझे जाने दो… तुम मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो?”
वीडियो का एक हिस्सा यह भी दिखाता है कि किशोरी खुद को बचाने की कोशिश में सड़क की तरफ भागती है। वहां से गुजर रही एक महिला ने दूर से पूछा— “क्या तुम ठीक हो?” लेकिन लड़की की लगातार “हेल्प! हेल्प!” की पुकारों के बावजूद उस महिला ने उसकी मदद करने की हिम्मत नहीं जुटाई। इस लापरवाही ने अदालत तक का ध्यान खींचा कि आखिर सार्वजनिक स्थानों पर पीड़ित की मदद करने में लोग क्यों पीछे हट रहे हैं।
कोर्ट में जैसे ही यह वीडियो चलाया गया, वहां मौजूद लोग सन्न रह गए। फुटेज इतना झकझोर देने वाला था कि एक आरोपी के वकील ने तक चेतावनी दी— “अगर यह वीडियो सार्वजनिक हुआ, तो हालात बिगड़ सकते हैं।”
पुलिस की तेज कार्रवाई और दोनों दोषियों की गिरफ्तारी
वारविकशायर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू की। कुछ ही समय में 17 वर्षीय दो युवकों— जान जहानजेब और इसरार नियाजल — को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में दोनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले और उन्हें अदालत में पेश किया गया।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश में लगी रही कि वह महिला राहगीर कौन थी, जिसने पीड़िता की चीखें तो सुनीं लेकिन सहायता नहीं की। हालांकि तकनीकी जांच और स्थानीय पूछताछ के बावजूद पुलिस अभी तक उस महिला की पहचान नहीं कर पाई है, जिससे यह बड़ा सवाल उठता है कि सामाजिक जिम्मेदारी के मामले में लोग इतने डर या उदासीन क्यों हो गए हैं।
कोर्ट का सख्त रुख, दोषियों को लंबी सजा
वारविक क्राउन कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई पूरी करते हुए दोनों दोषियों को कठोर सजा सुनाई। जज सिल्विया डी बर्टोडानो ने अपने फैसले में कहा कि यह घटना केवल कानून के खिलाफ नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ है। उन्होंने माना कि लड़की की बहादुरी सराहनीय है, क्योंकि इतने भयावह अनुभव के बाद भी उसने हिम्मत दिखाते हुए अपराधियों की पहचान करवाई और पूरे मामले को स्पष्ट रूप से बताया।
अदालत ने जहांजेब को 10 साल 8 महीने की कैद की सजा सुनाई, वहीं नियाजल को 9 साल 10 महीने की जेल दी गई। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि घटना में राहगीरों का निष्क्रिय रुख चिंताजनक है और यह समाज को सोचने पर मजबूर करता है कि पीड़ित की मदद के लिए आगे आने में लोग क्यों हिचकिचाते हैं।
यह मामला ब्रिटेन में सुरक्षा व्यवस्था, नागरिक जिम्मेदारी और अपराध रोकथाम जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाता है। अगर उस समय किसी ने रुककर लड़की को सहायता प्रदान की होती, तो शायद घटना का स्वरूप कुछ और होता। अब अदालत का फैसला आने के बाद स्थानीय समुदाय उम्मीद कर रहा है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।
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