Monday, February 2, 2026
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गुजरात से जुड़े कारोबारी परिवार ने खरीद ली पाकिस्तान की राष्ट्रीय एयरलाइन! इतने अरब में हुआ सौदा

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पाकिस्तान ने आखिरकार अपनी राष्ट्रीय ध्वजवाहक एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) के निजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर ली है। लंबे समय से घाटे, कर्ज और प्रबंधन की समस्याओं से जूझ रही इस एयरलाइन को सरकार के लिए संभालना मुश्किल हो गया था। ऐसे में पाकिस्तान सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए PIA को निजी हाथों में सौंपने का रास्ता चुना। मंगलवार को इस्लामाबाद में आयोजित बोली प्रक्रिया के बाद यह साफ हो गया कि अब PIA सरकारी नहीं, बल्कि एक निजी निवेश समूह के नियंत्रण में होगी। इस फैसले को पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और IMF के दबाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है, क्योंकि सरकार लगातार घाटे में चल रहे सरकारी उपक्रमों से छुटकारा पाना चाहती है।

इस्लामाबाद में हुई हाई-वोल्टेज बोली, तीन दिग्गज मैदान में

PIA के निजीकरण के लिए इस्लामाबाद में पारदर्शी तरीके से बोली प्रक्रिया आयोजित की गई थी। इस बोली में देश की बड़ी कंपनियां और निवेश समूह शामिल हुए। लकी सीमेंट, निजी एयरलाइन एयरब्लू और निवेश कंपनी आरिफ हबीब समूह ने अपनी-अपनी सीलबंद बोलियां सरकारी अधिकारियों के सामने पारदर्शी बॉक्स में जमा कीं। जब बोलियां खोली गईं तो सबसे ऊंची शुरुआती बोली आरिफ हबीब समूह की 115 अरब रुपये की निकली। इसके बाद लकी सीमेंट ने 105.5 अरब रुपये की बोली लगाई, जबकि एयरब्लू की बोली 26.5 अरब रुपये तक सीमित रही। शुरुआती आंकड़ों से ही यह साफ हो गया था कि मुकाबला आरिफ हबीब और लकी सीमेंट के बीच ही रहने वाला है।

गुजरात से जुड़ा कारोबारी नाम और 135 अरब का चौंकाने वाला ऑफर

बोली प्रक्रिया के दौरान माहौल तब और दिलचस्प हो गया जब आरिफ हबीब समूह और लकी सीमेंट ने एक-दूसरे को पछाड़ने के लिए धीरे-धीरे अपनी बोली बढ़ानी शुरू की। यह प्रतिस्पर्धा काफी देर तक चली, लेकिन निर्णायक मोड़ तब आया जब आरिफ हबीब समूह ने 135 अरब रुपये की अंतिम बोली लगा दी। इस रकम के सामने कोई भी कंपनी टिक नहीं पाई और लकी सीमेंट ने आगे बोली बढ़ाने से इनकार कर दिया। आरिफ हबीब समूह का संबंध एक ऐसे कारोबारी परिवार से बताया जाता है जिसकी जड़ें गुजरात से जुड़ी रही हैं, यही वजह है कि यह सौदा भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में चर्चा का विषय बन गया। 135 अरब रुपये में हुई यह डील पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी निजीकरण डील्स में गिनी जा रही है।

PIA के भविष्य पर क्या बदलेगा

PIA के निजीकरण के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एयरलाइन का भविष्य कैसा होगा। सरकार का कहना है कि निजी हाथों में जाने से एयरलाइन की सेवाओं में सुधार होगा, कर्ज कम होगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। वहीं, PIA के हजारों कर्मचारियों के मन में नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। निवेश समूह की ओर से भरोसा दिलाया गया है कि चरणबद्ध तरीके से सुधार किए जाएंगे और कर्मचारियों के हितों का भी ध्यान रखा जाएगा। यात्रियों को उम्मीद है कि अब फ्लाइट्स समय पर उड़ेंगी, सेवा स्तर सुधरेगा और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर PIA की साख दोबारा बनेगी। कुल मिलाकर, 135 अरब रुपये की यह डील न सिर्फ पाकिस्तान की एविएशन इंडस्ट्री बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।

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