पाकिस्तान की राजनीति और सैन्य प्रतिष्ठान में एक बार फिर भूचाल आ गया है. इस बार केंद्र में हैं पूर्व पाकिस्तानी सेना अधिकारी आदिल राजा, जिन्हें सरकार ने औपचारिक रूप से आतंकवादी घोषित कर दिया है. आदिल राजा कभी पाकिस्तान आर्मी का हिस्सा थे, लेकिन सेना छोड़ने के बाद वह ब्रिटेन में बस गए और वहां से यूट्यूब व अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए पाकिस्तानी राजनीति और सेना पर खुलकर टिप्पणी करने लगे. धीरे-धीरे वह पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थक और मौजूदा सैन्य नेतृत्व, खासकर सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के कट्टर आलोचक के रूप में पहचाने जाने लगे. उनके वीडियो और पोस्ट्स को बड़ी संख्या में लोग देखते और साझा करते थे, जिससे पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान को यह लगने लगा कि वह एक प्रभावशाली नैरेटिव तैयार कर रहे हैं.
किया गया आतंकी घोषित
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने इस हफ्ते एक आधिकारिक बयान जारी कर आदिल राजा को एंटी-टेरेरिज्म एक्ट, 1997 के तहत प्रतिबंधित व्यक्ति घोषित कर दिया. मंत्रालय का कहना है कि आदिल राजा की गतिविधियां पाकिस्तान की सुरक्षा, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन चुकी थीं. बयान में आरोप लगाया गया कि उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का लगातार दुरुपयोग किया और ऐसे नैरेटिव को बढ़ावा दिया जो कथित तौर पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से मेल खाते थे. सरकार के अनुसार, इन गतिविधियों का उद्देश्य पाकिस्तान की संप्रभुता को कमजोर करना और राज्य संस्थानों के खिलाफ अविश्वास फैलाना था. इसी आधार पर उन्हें कानून की चौथी शेड्यूल में शामिल कर लिया गया, जिसका मतलब है कि अब उन्हें आधिकारिक रूप से उच्च-जोखिम वाले प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में डाल दिया गया है.
आदिल राजा पर लगाए गए ये आरोप
आदिल राजा पर लगे आरोप केवल कानूनी नहीं, बल्कि गहरे राजनीतिक भी माने जा रहे हैं. पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि वह लगातार इमरान खान के पक्ष में बोलते रहे और मौजूदा सत्ता व्यवस्था, खासकर सेना नेतृत्व के खिलाफ माहौल बनाते रहे. सेना प्रमुख आसिम मुनीर के खिलाफ उनके बयानों को सरकार ने “सीधे उकसावे” और “राज्य विरोधी प्रोपेगेंडा” की श्रेणी में रखा है. जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि इमरान खान समर्थक पूरे डिजिटल इकोसिस्टम को चेतावनी देने की कोशिश है. पाकिस्तान में पहले भी कई पत्रकारों, एक्टिविस्ट्स और पूर्व अधिकारियों पर इसी तरह के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन एक पूर्व सेना अधिकारी को आतंकवाद कानून के तहत निशाना बनाना इस मामले को बेहद गंभीर बना देता है.
ब्रिटेन में बैठे आदिल राजा और प्रत्यर्पण की कोशिश
सरकार ने सिर्फ प्रतिबंध लगाने तक खुद को सीमित नहीं रखा है. पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने हाल ही में इस्लामाबाद में ब्रिटिश हाई कमिश्नर जेन मैरियट से मुलाकात कर आदिल राजा के प्रत्यर्पण से जुड़े दस्तावेज सौंपे हैं. पाक अधिकारियों का आरोप है कि आदिल राजा विदेश में बैठकर पाकिस्तान के खिलाफ सुनियोजित प्रोपेगेंडा कैंपेन चला रहे थे. हालांकि, ब्रिटेन सरकार की ओर से अब तक इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रिटेन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के कड़े कानूनों के चलते प्रत्यर्पण आसान नहीं होगा. फिर भी, इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान की सत्ता और सेना अब आलोचना को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बनाकर उससे निपटने की रणनीति अपना रही है. आदिल राजा का मामला आने वाले समय में पाकिस्तान की राजनीति, सैन्य-नागरिक रिश्तों और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी छवि को लेकर बड़ी बहस छेड़ सकता है.
Read More-पहले राष्ट्रपति ने किया सम्मानित अब मिली टीम की कमान, वैभव सूर्यवंशी को BCCI ने दी बड़ी जिम्मेदारी
