ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही देश में आलोचनाओं के घेरे में आ गए हैं। कई अमेरिकी नेताओं और सांसदों ने उनके फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि हालात को संभालने के बजाय स्थिति और बिगड़ती जा रही है। कांग्रेस के कुछ सदस्यों का मानना है कि बिना व्यापक सहमति के उठाए गए कदमों ने अमेरिका की रणनीतिक स्थिति को कमजोर किया है। यह मुद्दा अब सिर्फ विदेश नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के भीतर भी एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है।
‘अब संसद को आगे आना होगा’
अमेरिकी सीनेटर Bernie Sanders ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप इस तरह के फैसले देश को एक बड़े संकट में डाल सकते हैं और कांग्रेस को अब हस्तक्षेप करना चाहिए। वहीं, सांसद Jake Auchincloss ने आरोप लगाया कि ईरान के खिलाफ उठाए गए कदमों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले और इससे अमेरिका की छवि को नुकसान पहुंचा है। कई नेताओं का मानना है कि युद्ध जैसे गंभीर फैसलों में संतुलन और कूटनीति बेहद जरूरी होती है, जिसकी कमी दिखाई दे रही है।
पूर्व सहयोगियों ने भी जताई नाराजगी
पूर्व सहयोगी और नेता Marjorie Taylor Greene ने भी डोनाल्ड ट्रंप के रुख पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मौजूदा स्थिति में लिए जा रहे फैसले भविष्य में बड़े संकट को जन्म दे सकते हैं। वहीं, डेमोक्रेटिक नेता Chuck Schumer ने भी सोशल मीडिया पर किए गए बयानों को लेकर चिंता जताई और कहा कि इस तरह की भाषा से अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रभावित हो सकते हैं। इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि अमेरिका के भीतर इस मुद्दे पर गहरी असहमति बनी हुई है।
आगे क्या होगा? दुनिया की नजर अमेरिका पर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका आगे किस दिशा में कदम बढ़ाएगा। क्या यह तनाव कूटनीतिक बातचीत से कम होगा या हालात और बिगड़ेंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। ऐसे समय में संतुलित और सोच-समझकर लिए गए फैसले ही स्थिति को संभाल सकते हैं। फिलहाल, अमेरिकी राजनीति में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और विपक्ष इस संकट से कैसे निपटते हैं।
