पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई लंबी शांति वार्ता आखिरकार बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। करीब 21 घंटे तक चली इस अहम बातचीत से उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा और एक समझौते का रास्ता निकलेगा, लेकिन अंतिम समय में सब कुछ बदल गया। यह वार्ता ऐसे समय में हुई थी जब दोनों देशों के बीच 40 दिनों के संघर्ष के बाद दो हफ्ते का सीजफायर लागू किया गया था। इस लिहाज से यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही थी। हालांकि, वार्ता के अंत में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए असफलता की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की, जिससे हालात और उलझ गए हैं।
ईरान का आरोप: ‘आखिरी वक्त पर बदला अमेरिका का रुख’
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बातचीत फेल होने पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि ईरान पूरी ईमानदारी और सकारात्मक सोच के साथ इस वार्ता में शामिल हुआ था और समझौते के बेहद करीब पहुंच चुका था। लेकिन उनके मुताबिक, आखिरी समय में अमेरिका ने अपना रुख बदल दिया और नई शर्तें सामने रख दीं, जिससे पूरी प्रक्रिया पटरी से उतर गई। अराघची ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह एक ऐसा मौका था, जहां युद्ध को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता था, लेकिन अमेरिकी रवैये ने इस अवसर को खत्म कर दिया। ईरान का कहना है कि उसने हमेशा संवाद का रास्ता अपनाने की कोशिश की, लेकिन दूसरी ओर से भरोसे की कमी रही।
ईरानी नेतृत्व का सख्त संदेश, भरोसे पर उठे सवाल
ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी इस मुद्दे पर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले ही उन्हें अमेरिका की नीयत पर संदेह था और आखिरकार वही सच साबित हुआ। गालिबाफ के अनुसार, ईरान के पास समझौते के लिए इच्छाशक्ति जरूर थी, लेकिन पिछले अनुभवों के कारण भरोसे की कमी बनी हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरानी प्रतिनिधिमंडल का विश्वास जीतने में पूरी तरह असफल रहा। उनके बयान से साफ है कि अब दोनों देशों के बीच अविश्वास और गहरा गया है। गालिबाफ ने अपने देशवासियों का आभार जताते हुए कहा कि ईरान एकजुट है और किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
सीजफायर पर खतरा
इस वार्ता के असफल होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे क्या होगा? दो हफ्तों के लिए लागू किया गया सीजफायर अब खतरे में नजर आ रहा है। अमेरिका की ओर से भी साफ कर दिया गया है कि बातचीत बेनतीजा रही और यह स्थिति ईरान के लिए ठीक नहीं है। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। खासतौर पर तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश फिर से बातचीत की मेज पर लौटेंगे या तनाव और बढ़ेगा।
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