ईरान इस समय अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक का सामना कर रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और तेजी से गिरती राष्ट्रीय मुद्रा से परेशान जनता का गुस्सा अब सड़कों पर खुलकर दिखाई दे रहा है। बीते दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शनों ने गुरुवार रात अचानक उग्र रूप ले लिया, जब निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी की एक अपील ने हालात को पूरी तरह बदल दिया। इसके बाद ईरान में जो हुआ, उसने न केवल ईरानी शासन को हिला दिया, बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान ईरान की ओर खींच लिया है।
महंगाई और गिरती करेंसी ने भड़काया जनाक्रोश
ईरान में लंबे समय से आर्थिक हालात खराब चल रहे हैं। महंगाई अपने चरम पर है, आम लोगों की आय घटती जा रही है और ईरानी करेंसी की कीमत लगातार गिर रही है। रोजमर्रा की जरूरतों का सामान आम जनता की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। इन्हीं कारणों से पिछले दो हफ्तों से छोटे स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे, लेकिन गुरुवार की रात हालात अचानक विस्फोटक हो गए। जैसे ही क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने लोगों से इस्लामिक शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरने की अपील की, हजारों लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। देखते ही देखते यह प्रदर्शन 50 से ज्यादा शहरों में फैल गया और सरकार के लिए हालात संभालना मुश्किल हो गया।
रेजा पहलवी के समर्थन में गूंजे नारे, टूटा डर का साया
इस आंदोलन की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि प्रदर्शनकारियों ने खुलेआम रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए। ईरान में अब तक शाह या उनके परिवार के समर्थन में नारे लगाना बेहद खतरनाक माना जाता था और इसके लिए सख्त सजा तक दी जाती थी। लेकिन इस बार लोगों ने डर को पीछे छोड़ दिया। “इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद” और “पहलवी वापस आएंगे” जैसे नारे सड़कों पर गूंजते रहे। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक 39 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,260 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है। यह आंकड़े हालात की गंभीरता को साफ तौर पर दिखाते हैं।
इंटरनेट बंद, सुरक्षा बल तैनात, ट्रंप की एंट्री से बढ़ा दबाव
हालात को काबू में करने के लिए ईरानी सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद कर दी हैं। कई इलाकों में लोग पूरी तरह से ऑफलाइन हो गए हैं। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, देश के कई सर्विस प्रोवाइडर्स की कनेक्टिविटी अचानक ठप हो गई, जिससे जानकारी का प्रवाह लगभग रुक गया है। वहीं, सड़कों को खाली कराने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरानी लोगों की आवाज दबाने की कोशिश की गई तो अमेरिका इसे नजरअंदाज नहीं करेगा। रेजा पहलवी ने भी चेतावनी दी कि ईरान पर दुनिया और अमेरिकी राष्ट्रपति की नजर है और लोगों पर किए गए जुल्म का जवाब जरूर दिया जाएगा। यह बयान साफ संकेत देता है कि ईरान का यह आंतरिक संकट अब वैश्विक राजनीति का मुद्दा बनता जा रहा है।
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