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आतंकी के हाथ से छिनी बंदूक, अस्पताल में जिंदगी की जंग, अहमद के इलाज के लिए दान में इकठ्ठा हुए 1 करोड़

सिडनी के बोंडी बीच आतंकी हमले में शूटर से बंदूक छीनने वाले अहमद अल अहमद गंभीर रूप से घायल हुए. उनके इलाज के लिए शुरू फंडिंग कैंपेन में एक दिन में 6 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटे.

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सिडनी के बोंडी बीच पर हुए आतंकी हमले ने पूरे ऑस्ट्रेलिया को झकझोर कर रख दिया. समुद्र किनारे मौजूद आम लोग उस वक्त दहशत में आ गए, जब एक शूटर ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी. इसी अफरा-तफरी के बीच अहमद अल अहमद नाम के एक शख्स ने वह कर दिखाया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. जान की परवाह किए बिना अहमद ने पीछे से आतंकी पर झपट्टा मारा और उसे काबू में करने की कोशिश की. इसी दौरान गोली चलने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी. संघर्ष करते हुए उन्होंने हमलावर से उसकी बंदूक छीन ली और उसे उसी पर तान दिया, जिससे वहां मौजूद कई लोगों की जान बच गई. अहमद का यह साहसिक कदम अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है और लोग उन्हें ‘रियल लाइफ हीरो’ कहकर सम्मान दे रहे हैं.

गोली लगने के बाद अस्पताल में जिंदगी की जंग

आतंकी हमले के दौरान गोली लगने से अहमद अल अहमद बुरी तरह जख्मी हो गए. मौके पर मौजूद लोगों और सुरक्षा एजेंसियों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी आपात सर्जरी की. शुरुआती घंटों में उनकी हालत नाजुक बताई जा रही थी, लेकिन डॉक्टरों की टीम की कड़ी मेहनत के बाद धीरे-धीरे उनकी स्थिति में सुधार आने लगा. अस्पताल प्रशासन के मुताबिक अहमद को अभी भी इलाज और लंबी रिकवरी की जरूरत है. उनके परिवार ने बताया कि अहमद ने जो किया, वह किसी सुपरहीरो से कम नहीं है, लेकिन इसके बाद जो शारीरिक और मानसिक दर्द उन्होंने सहा, वह बहुत बड़ा है. इलाज के खर्च और आगे की मेडिकल जरूरतों को देखते हुए परिवार और समर्थकों ने फंडिंग कैंपेन शुरू करने का फैसला लिया.

एक दिन में उमड़ा समर्थन, 6 करोड़ रुपये से ज्यादा दान

जैसे ही अहमद अल अहमद की बहादुरी की कहानी लोगों तक पहुंची, पूरे ऑस्ट्रेलिया में समर्थन की लहर दौड़ गई. उनके इलाज के लिए शुरू किए गए फंडिंग कैंपेन में देखते ही देखते हजारों लोगों ने दान देना शुरू कर दिया. महज एक दिन के भीतर दान की कुल रकम 1.1 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर को पार कर गई, जो भारतीय मुद्रा में करीब 6.6 करोड़ रुपये से ज्यादा है. इस फंडिंग में आम नागरिकों के साथ-साथ कई सामाजिक संगठनों और जाने-माने चेहरों ने भी योगदान दिया. लोगों ने सोशल मीडिया पर अहमद को सलाम करते हुए लिखा कि अगर उस दिन उन्होंने हिम्मत न दिखाई होती, तो हालात और भी भयावह हो सकते थे. जैसे-जैसे उनकी सेहत में सुधार की खबरें सामने आ रही हैं, वैसे-वैसे दान की राशि में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

डर के आगे जीत और इंसानियत की मिसाल

अहमद अल अहमद की कहानी अब सिर्फ एक हमले की कहानी नहीं रही, बल्कि यह इंसानियत, साहस और एकजुटता की मिसाल बन गई है. जिस जगह पर लोग जान बचाने के लिए भाग रहे थे, वहां अहमद ने आगे बढ़कर खतरे का सामना किया. उनके इस कदम ने यह साबित कर दिया कि आम इंसान भी असाधारण हालात में असाधारण काम कर सकता है. ऑस्ट्रेलिया के अलग-अलग हिस्सों से लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अहमद का यह साहसिक कदम समाज में सुरक्षा और एक-दूसरे के लिए खड़े होने की भावना को मजबूत करेगा. इलाज के साथ-साथ उन्हें जो भावनात्मक समर्थन मिल रहा है, वह भी उनकी रिकवरी में अहम भूमिका निभा रहा है. बोंडी बीच की यह घटना भले ही दर्दनाक रही हो, लेकिन अहमद अल अहमद की बहादुरी ने उम्मीद की एक नई रोशनी जरूर जला दी है.

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