चीन से सामने आया यह मामला किसी मेडिकल थ्रिलर से कम नहीं है। शानडोंग प्रांत में रहने वाली 30 वर्षीय महिला एक फैक्ट्री में काम कर रही थी, तभी अचानक उसके बाल मशीन में फंस गए। कुछ ही सेकेंड में हादसा इतना गंभीर हो गया कि महिला का बायां कान पूरी तरह कटकर अलग हो गया। फैक्ट्री में अफरा-तफरी मच गई और महिला को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कान को उसी समय वापस जोड़ना संभव नहीं था। नसें और खून की नलियां बुरी तरह नष्ट हो चुकी थीं। आमतौर पर ऐसे मामलों में कटे अंग को बचा पाना बेहद मुश्किल माना जाता है, लेकिन इस बार डॉक्टरों ने हार मानने के बजाय एक अलग रास्ता चुना, जिसने आगे चलकर मेडिकल इतिहास में एक नई मिसाल कायम कर दी।
डॉक्टरों का अनोखा फैसला और नई तकनीक
अस्पताल की सर्जिकल टीम महिला को उसका कान वापस दिलाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थी। इसी दौरान डॉक्टरों ने “हेटेरोटोपिक सर्वाइवल” नाम की तकनीक अपनाने का फैसला किया। इस तकनीक में कटे हुए अंग को शरीर के किसी दूसरे हिस्से में अस्थायी रूप से जोड़ दिया जाता है, ताकि उसमें खून का बहाव बना रहे और ऊतक जीवित रहें। डॉक्टरों ने महिला के पैर के ऊपरी हिस्से को चुना, क्योंकि वहां रक्त संचार अच्छा होता है और त्वचा पतली होती है। करीब 10 घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी में बेहद बारीक नसों और रक्त नलियों को माइक्रोस्कोप की मदद से जोड़ा गया। सर्जरी के कुछ दिन बाद जब कान का रंग सामान्य होने लगा, तो डॉक्टरों को भरोसा हुआ कि उनका प्रयोग सफल हो रहा है।
पैर में जिंदा रहा कान, 5 महीने का संघर्ष
इसके बाद शुरू हुआ महिला के लिए सबसे अनोखा और चुनौतीपूर्ण दौर। करीब पांच महीने तक उसका कटा हुआ कान पैर में जुड़ा रहा। इस दौरान महिला को बेहद सावधानी बरतनी पड़ी। वह ढीले और खुले जूते पहनती थी, ताकि कान पर किसी तरह का दबाव न पड़े। नियमित जांच के लिए उसे अस्पताल आना पड़ता था, जहां डॉक्टर कान में रक्त प्रवाह, त्वचा की स्थिति और नसों की गतिविधि पर नजर रखते थे। इस पूरे समय महिला मानसिक रूप से भी मजबूत बनी रही, क्योंकि उसे भरोसा था कि एक दिन उसका कान वापस अपनी सही जगह पर लौटेगा। डॉक्टरों का कहना है कि यह चरण बेहद अहम था, क्योंकि इसी दौरान कान के ऊतक पूरी तरह मजबूत और स्थिर हुए।
दूसरी सर्जरी और पूरा हुआ ‘चमत्कार’
करीब पांच महीने बाद अक्टूबर में डॉक्टरों ने दूसरा और सबसे जोखिम भरा कदम उठाया। इस सर्जरी में कान को पैर से अलग कर फिर से उसके असली स्थान यानी सिर पर फिट किया गया। यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से बेहद कठिन थी, क्योंकि नसों को दोबारा सही तरीके से जोड़ना जरूरी था। कई घंटों तक चली इस सर्जरी के बाद आखिरकार सफलता मिली। महिला का कान न सिर्फ सही जगह पर जुड़ गया, बल्कि उसमें रक्त प्रवाह भी सामान्य हो गया। फिलहाल महिला तेजी से ठीक हो रही है और डॉक्टरों की निगरानी में है। मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक उन मामलों में बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जहां तुरंत अंग को वापस जोड़ना संभव नहीं होता। यह घटना न सिर्फ चीन बल्कि पूरी दुनिया में आधुनिक सर्जरी और डॉक्टरों की काबिलियत का शानदार उदाहरण बन चुकी है।
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