बांग्लादेश में हाल के महीनों में जिस तरह से धार्मिक कट्टरता से जुड़े घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, उसने पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI बांग्लादेश में एक नई कट्टरपंथी सैन्य संरचना खड़ी करने की साजिश में जुटी हुई है। इस योजना के तहत एक विशेष यूनिट तैयार की जा रही है, जिसे नेशनल आर्म्ड रिजर्व (NAR) नाम दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क पर कड़ी नजर रखे हुए हैं क्योंकि यह सिर्फ बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है।
8000 से ज्यादा युवाओं की भर्ती, शरिया बना हथियार
खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस कथित नेशनल आर्म्ड रिजर्व में 8000 से ज्यादा कट्टरपंथी युवाओं को शामिल करने की तैयारी है। इन युवाओं को धार्मिक विचारधारा के नाम पर प्रेरित किया जा रहा है और उन्हें शरिया कानून को सर्वोच्च मानने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह भर्ती प्रक्रिया बेहद सुनियोजित तरीके से चल रही है, जिसमें मदरसों, धार्मिक संगठनों और सोशल मीडिया नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है। युवाओं को यह विश्वास दिलाया जा रहा है कि शरिया आधारित शासन ही देश को “सही रास्ते” पर ले जा सकता है, जबकि असल मकसद सत्ता और नियंत्रण हासिल करना बताया जा रहा है।
ISI की भूमिका पर सवाल, पाकिस्तान की पुरानी रणनीति?
अधिकारियों का मानना है कि यह पूरी योजना पाकिस्तान की उसी पुरानी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह पड़ोसी देशों में अस्थिरता फैलाने के लिए कट्टरपंथी संगठनों का इस्तेमाल करता रहा है। ISI पर पहले भी अफगानिस्तान, कश्मीर और अन्य क्षेत्रों में ऐसे नेटवर्क खड़े करने के आरोप लगते रहे हैं। बांग्लादेश में NAR जैसी यूनिट बनाने की कोशिश को विशेषज्ञ “प्रॉक्सी आर्मी मॉडल” के तौर पर देख रहे हैं। यह यूनिट सीधे तौर पर किसी देश की नियमित सेना का हिस्सा नहीं होगी, लेकिन जरूरत पड़ने पर हिंसा, दबाव और डर के जरिए अपने एजेंडे को लागू करने में सक्षम होगी।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर खतरा, आगे क्या?
अगर यह योजना पूरी तरह से अमल में आती है, तो इसका असर सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहेगा। दक्षिण एशिया में पहले से मौजूद सुरक्षा चुनौतियां और जटिल हो सकती हैं। कट्टरपंथी युवाओं की संगठित सैन्य ताकत लोकतांत्रिक ढांचे, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि बांग्लादेश सरकार को समय रहते सख्त कदम उठाने होंगे, ताकि किसी भी तरह की समानांतर कट्टरपंथी सेना खड़ी होने से पहले ही उसे रोका जा सके। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ढाका इस खतरे से निपटने के लिए क्या रणनीति अपनाता है।
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