Monday, February 2, 2026
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विदेश में की क्रिश्चियन शादी, फिर काशी आकर लिया सात जन्मों का वचन, इटली के एंटोलिया और ग्लोरियस ने रचाई हिंदू रीति से शादी

इटली के एंटोलिया और ग्लोरियस ने वाराणसी के नवदुर्गा मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से दोबारा शादी की, कहा—“सनातन परंपरा में है आत्मा का सच्चा बंधन।”

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Italy Couple Hindu Wedding in Kashi: भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाली काशी ने एक बार फिर विश्व को अपनी परंपराओं का दर्शन कराया। इस बार वजह बनी एक विदेशी प्रेम कहानी। इटली के निवासी एंटोलिया और ग्लोरियस ने वाराणसी के नवदुर्गा मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी रचाकर सभी का ध्यान खींच लिया।

यह जोड़ा एक साल पहले इटली में क्रिश्चियन तरीके से विवाह कर चुका था, लेकिन सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रति गहरे आकर्षण ने इन्हें दोबारा विवाह के बंधन में बांध दिया — इस बार हिंदू विधि से, सात फेरों और सिंदूरदान के साथ।

सुबह के शुभ मुहूर्त में वाराणसी के नवदुर्गा मंदिर में वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच विवाह की रस्में शुरू हुईं। आचार्य मनोज मिश्रा के नेतृत्व में पूरे विधि-विधान से मंडप सजा। पंडितों ने पहले गणेश पूजन करवाया, फिर वरमाला, कन्यादान और अंत में सात फेरे की रस्म पूरी हुई।

दुल्हन एंटोलिया ने पारंपरिक लाल बनारसी साड़ी पहन रखी थी, जबकि दूल्हा ग्लोरियस ने क्रीम रंग की शेरवानी धारण की। दोनों ने अग्नि के सात फेरे लिए, फिर सिंदूरदान के बाद एक-दूसरे को जीवनभर साथ निभाने का वचन दिया। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद भारतीय और विदेशी श्रद्धालुओं ने तालियां बजाकर नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं दीं।

“भारत में आत्मा जुड़ती है, सिर्फ शरीर नहीं” बोले ग्लोरियस

इस दौरान ग्लोरियस ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमने पहले चर्च में शादी की थी, लेकिन हिंदू परंपरा में आत्माओं का मिलन होता है। यही हमें यहां तक खींच लाया।”

दुल्हन एंटोलिया ने कहा, “मैं हमेशा से भारतीय संस्कृति और आध्यात्म में विश्वास रखती हूं। वाराणसी में शादी करना मेरे लिए सिर्फ सपना नहीं, बल्कि आत्मिक अनुभव है।” दोनों ने बताया कि उन्होंने विवाह के संस्कारों के अर्थ पहले से समझे थे और प्रत्येक मंत्र के भाव को गहराई से महसूस किया।

दोनों विदेशी नागरिक पिछले छह महीने से भारत में रहकर योग और वेद अध्ययन कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें हिंदू संस्कारों की गहराई का अनुभव हुआ। एंटोलिया ने बताया कि उन्होंने गीता और उपनिषद का अध्ययन किया, जिसके बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि “विवाह सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक बंधन” है।

आचार्य मनोज मिश्रा ने कहा, “यह विवाह इस बात का प्रमाण है कि सनातन धर्म का सार सीमाओं से परे है। यह आत्मा, श्रद्धा और संस्कार का बंधन है। जब विदेशी लोग भारतीय परंपराओं को अपनाते हैं, तो यह हमारे धर्म की वैश्विक स्वीकृति का संकेत है।”

काशी बन रही विदेशी जोड़ों की पसंदीदा वेडिंग डेस्टिनेशन

वाराणसी की गलियों में यह विदेशी विवाह चर्चा का विषय बना रहा। स्थानीय लोगों ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब किसी विदेशी जोड़े ने यहां हिंदू रीति-रिवाज से शादी की हो। पिछले कुछ वर्षों में कई यूरोपीय और अमेरिकी कपल्स भी काशी में वैदिक विवाह कर चुके हैं।

ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार, अब “स्पिरिचुअल डेस्टिनेशन वेडिंग” का चलन तेजी से बढ़ रहा है। कई विदेशी जोड़े काशी, हरिद्वार और पुष्कर जैसे धार्मिक स्थलों को अपने विवाह स्थल के रूप में चुन रहे हैं।

केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि दो संस्कृतियों के संगम का उदाहरण बन गया है। यह विवाह दर्शाता है कि सनातन परंपरा की जड़ें न केवल भारत, बल्कि विश्व के हर कोने तक फैली हैं।

एंटोलिया और ग्लोरियस ने विवाह के अंत में कहा, “हम अब केवल पति-पत्नी नहीं, बल्कि दो आत्माएं हैं जो सात जन्मों के लिए बंध चुकी हैं।”
काशी के नवदुर्गा मंदिर से निकलते समय दोनों ने गंगा आरती में भी हिस्सा लिया और भगवान शिव से अपने वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद मांगा।

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