सीरिया में एक बार फिर हालात उस वक्त तनावपूर्ण हो गए, जब अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ बड़े पैमाने पर एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिका और उसके सहयोगी बलों ने मिलकर सीरिया के कई इलाकों में ISIS के ठिकानों को निशाना बनाया। यह हमला अचानक नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरी रणनीति और कड़ा संदेश छिपा हुआ था। अमेरिकी सेना ने साफ किया कि ये हमले सीरिया भर में फैले उन आतंकी अड्डों पर किए गए, जहां से ISIS अपने नेटवर्क को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रहा था। इन एयर स्ट्राइक के बाद क्षेत्र में हलचल तेज हो गई और एक बार फिर यह सवाल उठने लगा कि क्या ISIS फिर से सिर उठाने की कोशिश कर रहा है या यह उसकी आखिरी बची ताकत पर निर्णायक वार है।
पल्मायरा हमले का बदला – ट्रंप प्रशासन की सख्त प्रतिक्रिया
इन हमलों की जड़ें पिछले महीने सीरिया के पल्मायरा क्षेत्र में हुए उस घातक आतंकी हमले से जुड़ी हैं, जिसमें अमेरिकी सैनिकों की जान गई थी। उस हमले में सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस-टोवर, सार्जेंट विलियम नथानिएल हॉवर्ड और अमेरिकी नागरिक दुभाषिये अयाद मंसूर सकात की मौत हो गई थी। ट्रंप प्रशासन ने इस हमले को सीधे तौर पर अमेरिकी सेना पर हमला माना और इसका जवाब देने का फैसला किया। शनिवार को किए गए ये एयर स्ट्राइक उसी बदले का हिस्सा थे। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ जवाबी हमला नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसे किसी भी हमले को रोकने के लिए एक कड़ा संदेश भी है। अमेरिका यह दिखाना चाहता है कि उसके सैनिकों को नुकसान पहुंचाने वालों को दुनिया के किसी भी कोने में बख्शा नहीं जाएगा।
“कहीं भी छिप जाओ, बच नहीं पाओगे” – यूएस सेंट्रल कमांड का संदेश
यूएस सेंट्रल कमांड ने इस ऑपरेशन के बाद बेहद सख्त शब्दों में बयान जारी किया। बयान में कहा गया, “हमारा संदेश बिल्कुल साफ है। यदि आप हमारे सैनिकों को नुकसान पहुंचाते हैं, तो हम आपको दुनिया में कहीं भी ढूंढ निकालेंगे और मार देंगे। चाहे आप न्याय से बचने की कितनी भी कोशिश क्यों न करें।” इस बयान ने साफ कर दिया कि अमेरिका अब किसी भी तरह की नरमी के मूड में नहीं है। इसी बीच सीरिया के अधिकारियों ने दावा किया कि उनके सुरक्षाबलों ने लेवांत क्षेत्र में ISIS के सैन्य ऑपरेशनों के एक बड़े नेता को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, अमेरिकी हमलों में किन-किन सहयोगी बलों ने हिस्सा लिया, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन यह माना जा रहा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से समन्वय के साथ की गई।
ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक और बदलता सीरियाई समीकरण
इस पूरे सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ नाम दिया गया है। अमेरिकी सेना के अनुसार, इसकी शुरुआत 19 दिसंबर को एक बड़े हमले के साथ हुई थी, जिसमें मध्य सीरिया में ISIS के बुनियादी ढांचे और हथियारों से जुड़े करीब 70 ठिकानों को निशाना बनाया गया। मारे गए दोनों अमेरिकी सैनिक, टोरेस-टोवर और हॉवर्ड, आयोवा नेशनल गार्ड के सदस्य थे। लंबे समय से कुर्द नेतृत्व वाली सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेज (SDF) ISIS के खिलाफ अमेरिका की मुख्य सहयोगी रही है। हालांकि, दिसंबर 2024 में पूर्व सीरियाई राष्ट्रपति बशर असद के सत्ता से हटने के बाद हालात तेजी से बदले हैं। अब अमेरिका सीरिया की मौजूदा सरकार के साथ भी समन्वय बढ़ा रहा है। हाल ही में सीरिया का ISIS के खिलाफ वैश्विक गठबंधन में शामिल होना इस बदलते समीकरण की सबसे बड़ी मिसाल माना जा रहा है। यह संकेत देता है कि आने वाले समय में ISIS के खिलाफ लड़ाई और भी तेज हो सकती है।
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