Sunday, February 1, 2026
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PM के बाद सबसे कठिन जिम्मेदारी किसके पास? आलोचनाओं के बीच गौतम गंभीर को मिला शशि थरूर का खुला समर्थन

शशि थरूर ने नागपुर में गौतम गंभीर से मुलाकात कर भारत के कोच की नौकरी को प्रधानमंत्री के बाद सबसे मुश्किल काम बताया।

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नागपुर में भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहले टी20 मुकाबले से पहले एक दिलचस्प और चर्चित मुलाकात देखने को मिली, जिसने सियासत और क्रिकेट दोनों जगत में हलचल मचा दी। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर से मुलाकात की और उनकी जमकर सराहना की। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब टीम इंडिया के प्रदर्शन और कुछ फैसलों को लेकर गंभीर लगातार आलोचनाओं के घेरे में हैं। शशि थरूर ने इस मुलाकात की एक तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर साझा की, जिसने देखते ही देखते लोगों का ध्यान खींच लिया। खास बात यह रही कि थरूर ने कोच के रूप में गंभीर की भूमिका को प्रधानमंत्री के बाद देश की सबसे मुश्किल जिम्मेदारी करार दिया, जिससे इस बयान को राजनीतिक और खेल दोनों नजरियों से अहम माना जा रहा है।

“PM के बाद सबसे मुश्किल काम” – थरूर का बयान

शशि थरूर ने अपने पोस्ट में लिखा कि उन्होंने अपने “पुराने दोस्त” गौतम गंभीर के साथ खुलकर और सकारात्मक बातचीत की। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम का कोच होना प्रधानमंत्री के बाद भारत में सबसे कठिन काम है, क्योंकि हर दिन लाखों लोग टीम और कोच के फैसलों पर राय देते हैं। थरूर के मुताबिक, इस दबाव के बावजूद गंभीर शांत रहते हैं और बिना डरे आगे बढ़ते हैं। उन्होंने गंभीर के “शांत दृढ़ संकल्प” और “सक्षम नेतृत्व” की खुलकर तारीफ की और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। थरूर का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब सोशल मीडिया और क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच कोच की भूमिका, चयन प्रक्रिया और रणनीतियों को लेकर तीखी बहस चल रही है। उनके समर्थन को गंभीर के लिए एक बड़ा नैतिक बल माना जा रहा है।

सियासत और क्रिकेट का अनोखा रिश्ता

गौर करने वाली बात यह है कि गौतम गंभीर और शशि थरूर अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं। गंभीर 2019 से 2024 तक पूर्वी दिल्ली से बीजेपी के सांसद रह चुके हैं, जबकि थरूर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद हैं। इसके बावजूद दोनों के बीच व्यक्तिगत सम्मान और दोस्ती साफ नजर आई। यह मुलाकात इस बात का संकेत भी देती है कि खेल के मैदान और उससे जुड़ी जिम्मेदारियां राजनीति से ऊपर होती हैं। थरूर का यह रुख दिखाता है कि क्रिकेट जैसे राष्ट्रीय जुनून के मामले में राजनीतिक मतभेद पीछे छूट सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान न सिर्फ गंभीर की छवि को मजबूती देते हैं, बल्कि यह भी याद दिलाते हैं कि भारतीय क्रिकेट में कोच की भूमिका कितनी जटिल और दबाव से भरी होती है।

समर्थन पर जताया आभार, आलोचकों पर हल्का व्यंग्य

शशि थरूर के इस सार्वजनिक समर्थन के बाद गौतम गंभीर ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने थरूर को धन्यवाद देते हुए लिखा कि जब माहौल शांत होगा, तब एक कोच की कथित “असीमित अथॉरिटी” को लेकर फैली गलतफहमियां खुद-ब-खुद साफ हो जाएंगी। गंभीर ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात पर हंसी आती है कि किस तरह उन्हें अपने ही लोगों के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है, जबकि वही लोग सबसे अच्छे हैं। गंभीर का यह जवाब साफ करता है कि वह आलोचनाओं से विचलित नहीं हैं और अपनी जिम्मेदारी को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। शशि थरूर का समर्थन और गंभीर की प्रतिक्रिया इस पूरे मामले को एक नए नजरिए से देखने का मौका देती है, जहां खेल, नेतृत्व और सार्वजनिक दबाव की असल तस्वीर सामने आती है।

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