हाल ही में JAMA Network Open में छपी एक रिसर्च में यह सामने आया कि सोशल मीडिया से सात दिन दूर रहने पर युवा लोगों में मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। अध्ययन के अनुसार, इस छोटे से ब्रेक से डिप्रेशन के लक्षण लगभग 24 प्रतिशत तक कम हो गए। इसके अलावा, एंग्जायटी में 16.1 प्रतिशत और नींद से जुड़े विकारों में करीब 14.5 प्रतिशत तक सुधार हुआ। लगातार सोशल मीडिया का उपयोग मानसिक थकान, चिंता और नींद की समस्याओं को बढ़ा सकता है। ऐसे में सिर्फ सात दिन का सोशल मीडिया डिटॉक्स युवा और वयस्क दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है सोशल मीडिया का प्रभाव
सोशल मीडिया अक्सर तुलना, फोबिया और चिंता को बढ़ा देता है। लगातार नोटिफिकेशन और अपडेट्स से मस्तिष्क पर दबाव बनता है। रिसर्च में यह पाया गया कि सात दिन का ब्रेक लेने से व्यक्ति की सोच और मूड में सुधार होता है। सोशल मीडिया ब्रेक से रात में नींद बेहतर आती है, इंसोम्निया या नींद से जुड़े विकारों में कमी आती है और सुबह ताजगी महसूस होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल डिटॉक्स का यह छोटा कदम मानसिक स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव ला सकता है।
7 दिन का आसान सोशल मीडिया डिटॉक्स प्लान
दिन 1-2: सोशल मीडिया ऐप्स को फोन से डिलीट करें या नोटिफिकेशन बंद करें। कोशिश करें कि दिन में केवल जरूरी काम के लिए ही फोन देखें।
दिन 3-4: फोन का समय सीमित करें, जैसे हर दो घंटे में सिर्फ 15 मिनट। खाली समय में किताब पढ़ना या टहलना शामिल करें।
दिन 5-6: डिजिटल एक्टिविटी को कम कर दें। सोशल मीडिया के बजाय दोस्त और परिवार के साथ समय बिताएं। ध्यान या योग को रूटीन में शामिल करें।
दिन 7: सप्ताह के अनुभव को नोट करें। महसूस करेंगे कि मूड और नींद में सुधार हुआ है। इस अनुभव से सीखें कि डिजिटल ब्रेक लेने से कितनी राहत मिलती है।
सोशल मीडिया ब्रेक से होते है कई लाभ
इस छोटे ब्रेक से मानसिक स्वास्थ्य में स्पष्ट सुधार देखा गया। डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षण कम होते हैं, नींद बेहतर आती है, और मन शांत रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल सात दिन का डिजिटल डिटॉक्स आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक शक्तिशाली शुरुआत हो सकती है। अगर आप महसूस करते हैं कि सोशल मीडिया आपकी नींद, मूड या उत्पादकता पर असर डाल रहा है, तो सात दिन का सोशल मीडिया ब्रेक आजमाना एक सरल और असरदार उपाय है।
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