Bengal BJP CM: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि सुवेंदु अधिकारी राज्य के नए मुख्यमंत्री बन सकते हैं। 293 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने 200 से ज्यादा सीटें जीतकर सत्ता में वापसी का रास्ता साफ किया है और 15 साल से सत्ता में रही ममता बनर्जी की सरकार को बड़ा झटका लगा है। सूत्रों के अनुसार, विधायक दल की बैठक में सुवेंदु अधिकारी को नेता चुना जाएगा, जिसके बाद उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग तय हो जाएगा। हालांकि पार्टी की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
क्यों सबसे आगे रहे सुवेंदु अधिकारी?
मुख्यमंत्री पद की रेस में कई बड़े नाम चर्चा में थे, लेकिन सुवेंदु अधिकारी शुरुआत से ही सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। उन्होंने चुनाव में आक्रामक रणनीति अपनाई और सीधे तौर पर ममता बनर्जी को चुनौती दी। भवानीपुर और नंदीग्राम जैसे अहम क्षेत्रों में उनकी जीत ने उनकी राजनीतिक ताकत को और मजबूत किया। दिलीप घोष, समीक भट्टाचार्य, रूपा गांगुली और अग्निमित्रा पॉल जैसे नाम भी चर्चा में थे, लेकिन अंततः सुवेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे निकलता दिख रहा है। उनकी छवि एक आक्रामक और जमीनी नेता की रही है, जिसने चुनावी मैदान में बीजेपी को मजबूती दी।
टीएमसी से बीजेपी तक का सफर
सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। वे कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाते थे और तृणमूल कांग्रेस में उनकी मजबूत पकड़ थी। लेकिन दिसंबर 2020 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्होंने लगातार ममता बनर्जी पर तीखे हमले किए और खुद को बीजेपी के प्रमुख चेहरे के रूप में स्थापित किया। उनके परिवार का भी बंगाल के पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर जिलों में मजबूत राजनीतिक प्रभाव रहा है, जिससे उनकी पकड़ और मजबूत होती है।
बंगाल की राजनीति में नए दौर की शुरुआत
अगर विधायक दल की बैठक में सुवेंदु अधिकारी के नाम पर मुहर लगती है, तो बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत मानी जाएगी। बीजेपी के लिए यह जीत न सिर्फ सत्ता परिवर्तन है, बल्कि राज्य में अपनी विचारधारा को मजबूत करने का मौका भी है। वहीं विपक्ष के रूप में ममता बनर्जी की भूमिका भी अहम होगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री के रूप में किस तरह की नीतियां अपनाते हैं और राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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