भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान भोजपुर के बिलौटी गांव पहुंचे। यहां उन्होंने भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और परिवार के अन्य लोगों से मुलाकात की। सबसे पहले उन्होंने भरत तिवारी की तस्वीर पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद परिवार से पूरी घटना की जानकारी ली और कहा कि वह हर हाल में न्याय दिलाने की कोशिश करेंगे। चिराग पासवान के गांव पहुंचने को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले वह इस मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी बात कर चुके हैं।
‘अगर आत्मसमर्पण किया था तो गिरफ्तारी होनी चाहिए थी’
मीडिया से बात करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने आत्मसमर्पण किया था, तो पुलिस को उसे गिरफ्तार करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। कानून सभी के लिए बराबर है और हर व्यक्ति के साथ कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में किसी अधिकारी की गलती सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर लोगों का कानून और न्याय व्यवस्था से भरोसा कम हो सकता है।
सरकार से करेंगे बात, निष्पक्ष जांच की मांग
चिराग पासवान ने कहा कि उन्होंने इस मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से चर्चा की है। अब वह बिहार सरकार से भी बात करेंगे ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके। उन्होंने कहा कि परिवार जिस तरह की जांच चाहता है, उस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि सच सामने आना जरूरी है और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए वह लगातार प्रयास करते रहेंगे।
अधिकारी की पोस्टिंग पर भी उठाए सवाल
चिराग पासवान ने इस मामले से जुड़े पूर्व एसडीपीओ राजेश शर्मा की नई पोस्टिंग पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे हों, उनकी पहले जांच पूरी होनी चाहिए। जांच पूरी होने से पहले नई जिम्मेदारी देना सही संदेश नहीं देता। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता रखनी चाहिए ताकि लोगों का प्रशासन पर भरोसा बना रहे। उन्होंने दोहराया कि भरत तिवारी मामले में किसी भी दोषी को नहीं बख्शा जाना चाहिए और निष्पक्ष जांच के बाद सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
