आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के हालिया बयान और सोशल मीडिया वीडियो ने पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति पैदा कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अनुराग ढांडा ने चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अब अरविंद केजरीवाल के सिपाही नहीं रहे और पार्टी के मूल सिद्धांतों से हटते जा रहे हैं। ढांडा ने कहा, “हम केजरीवाल के सिपाही हैं। निडरता हमारी पहली पहचान है। जो डर जाए, वह देश के लिए क्या लड़ेगा?” इस बयान से साफ हो गया कि पार्टी के अंदर राघव चड्ढा के खिलाफ गुस्सा और सवाल दोनों बढ़ रहे हैं।
संसद में भूमिका पर उठाए सवाल
अनुराग ढांडा ने राघव चड्ढा की संसद में भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सांसदों को संसद में बोलने का सीमित समय मिलता है, और इसका उपयोग देश के गंभीर मुद्दों पर होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चड्ढा ने अपने समय का इस्तेमाल “एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने” जैसे मामूली मुद्दों पर किया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह असंतोष इसलिए भी गहरा गया क्योंकि चड्ढा ने पार्टी की नीति और दिशा के अनुरूप गंभीर मुद्दों पर ठोस आवाज़ नहीं उठाई।
हम केजरीवाल के सिपाही हैं। निडरता पहली पहचान है हमारी।
कोई मोदी से डर जाए तो लड़ेगा क्या देश के लिए?
संसद में थोड़ा सा समय मिलता है बोलने का पार्टी को, उसमें या तो देश बचाने का संघर्ष कर सकते हैं या एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने का।
गुजरात में हमारे सैंकड़ों…
— Anurag Dhanda (@anuragdhanda) April 3, 2026
पश्चिम बंगाल और गुजरात पर उठाए सवाल
AAP के वरिष्ठ नेता Saurabh Bharadwaj ने भी चड्ढा पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि क्या चड्ढा ने गुजरात में गिरफ्तार किए गए पार्टी कार्यकर्ताओं के समर्थन में संसद में आवाज़ उठाई और क्या उन्होंने पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र पर कथित हमलों के खिलाफ कोई ठोस पहल की। भारद्वाज ने कहा कि सीमित समय का उपयोग गंभीर मुद्दों के लिए होना चाहिए, लेकिन चड्ढा उस भूमिका में सक्रिय नहीं दिख रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब पार्टी सांसद वॉकआउट करते हैं, तब भी चड्ढा सदन में मौजूद रहते हैं, जिससे पार्टी में असंतोष और बढ़ा है।
पंजाब के CM ने भी जताई नाराजगी
पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने भी राघव चड्ढा के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पार्टी के मुद्दे से हटकर बोलना किसी भी नेता के लिए स्वीकार्य नहीं है। पार्टी में एकजुटता और सिद्धांतों का पालन करना जरूरी है, और राघव चड्ढा के हालिया बयान ने इस बात पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि चड्ढा इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और पार्टी के भीतर इस असंतोष को कैसे संभाला जाता है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि इस मामले से पार्टी की अंदरूनी स्थिति और नेताओं के बीच संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।
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