JP Nadda: संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा (JP Nadda) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। इस वीडियो में नड्डा आपातकाल के दौर का जिक्र करते हुए बताते हैं कि छात्र राजनीति के समय उन्हें कई बार क्लासरूम से गिरफ्तार किया गया था। इसी वीडियो को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया। वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने केवल “इमरजेंसी के दौरान” लिखकर अपनी प्रतिक्रिया दी। इसके बाद यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी और लोगों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
राज्यसभा में किस मुद्दे पर हुई थी चर्चा?
यह पूरा मामला राज्यसभा में उस समय सामने आया, जब विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और सीपीएम सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने दिल्ली स्थित ए.के.जी. भवन में पुलिस के पहुंचने का मुद्दा उठाया। विपक्ष का कहना था कि पुलिस एक छात्र नेता को गिरफ्तार करने के लिए पार्टी कार्यालय तक पहुंची थी। इस पर जवाब देते हुए जेपी नड्डा (JP Nadda) ने कहा कि इसे जरूरत से ज्यादा बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है। उनके अनुसार यह केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ी सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई थी और पुलिस ने अपने अधिकारों के तहत काम किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
“During the emergency” https://t.co/iWR46vMPNS
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) July 29, 2026
नड्डा ने सुनाया अपने छात्र जीवन का अनुभव
सदन में बोलते हुए जेपी नड्डा (JP Nadda)ने अपने छात्र जीवन का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान वह छात्र आंदोलन से जुड़े थे और उस समय उन्हें एक नहीं बल्कि कई बार क्लासरूम से गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति और आंदोलनों में सक्रिय रहने वाले लोगों को कई बार कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार पुलिस अपने कर्तव्य के अनुसार कार्रवाई करती है और वर्तमान मामले को भी उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई को अनावश्यक विवाद का रूप नहीं दिया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा
अभिजीत दीपके द्वारा वीडियो साझा किए जाने के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने इस पर अपनी-अपनी राय रखी, जबकि राजनीतिक गलियारों में भी इसे लेकर बहस तेज हो गई। एक ओर विपक्ष इस मामले को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि पुलिस ने केवल कानून के मुताबिक कार्रवाई की है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज हो सकती हैं, क्योंकि संसद के भीतर और बाहर छात्र आंदोलनों तथा पुलिस कार्रवाई को लेकर लगातार बहस जारी है।
Read More-पूर्व IPS किरण बेदी ने पुलिस व्यवस्था पर उठाए बड़े सवाल, कहा- हर प्रदर्शन में…
