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अग्निवीर अमृतपाल सिंह को सलामी ना देने पर गरमाई UP की सियासत,RLD ने बताया शहीदों का अपमान

पंजाब के रहने वाले अमृतपाल सिंह अपने पिता के इकलौते बेटे थे और 2022 में उनकी सेना में भर्ती हुई थी। अग्नि वीर बनाकर भारतीय सेना में भर्ती हुए पंजाब के रहने वाले अमृतपाल सिंह की 10 अक्टूबर को गोली लगने के कारण मौत हो गई है।

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UP Politics: जम्मू कश्मीर के पुंछ में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए अग्नि वीर अमृत पाल सिंह को सेना की ओर से सलामी न दिए जाने पर अब उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। पंजाब के रहने वाले अमृतपाल सिंह अपने पिता के इकलौते बेटे थे और 2022 में उनकी सेना में भर्ती हुई थी। अग्नि वीर बनाकर भारतीय सेना में भर्ती हुए पंजाब के रहने वाले अमृतपाल सिंह की 10 अक्टूबर को गोली लगने के कारण मौत हो गई है।

केंद्र सरकार पर उठाए सवाल

पंजाब के शहीद हुए सैनिक सत्यपाल सिंह को भारतीय सेना की ओर से सलामी नहीं दी गई है। अब इसको लेकर बिहार के पूर्व राज्यपाल सत्य प्रकाश मालिक और राष्ट्रीय लोक दल ने केंद्र सरकार पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने ट्विटर पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा है,’आज शहीद अग्निवीर अमृतपाल सिंह का पार्थिव शरीर उनके गांव कोटली कलां आया जिसे दो फौजी भाई प्राइवेट एंबुलेंस से छोड़कर गए! जब ग्रामीणों ने पूछा तो उन्हें बताया गया कि केंद्र सरकार की नई नीति के तहत अग्नि वीर को शहीद का दर्जा नहीं दिया गया है। इसीलिए सलामी नहीं दी जाएगी!’

केंद्र सरकार को शर्म आनी चाहिए

इसके आगे उन्होंने पोस्ट में लिखा कि,’फिर SSP साहब से गांव वालों ने बात कर पुलिस कर्मियों से सलामी दिलवाई। ये घटना साबित करती है की अग्नि वीर इसीलिए बनाए हैं ताकि शाहिद का दर्जा न दिया जाए और फौज खत्म हो जाए। केंद्र सरकार को शर्म आनी चाहिए कि वह शहीद का दर्जा नहीं दे रही है। वही आरएलडी पार्टी ने ट्वीट करते हुए लिखा है,’अग्नि वीर के तौर पर सेवा में भर्ती हुए पंजाब की अमृतपाल सिंह कश्मीर में देश के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए शत् शत् नमन यह विडंबना ही है की अग्नि वीर से भर्ती होना उन्हें देश का जान न्योछावर करने के कर्तव्य तो बता गया लेकिन एक सहित को मिलने वाले सामान से उन्हें वंचित कर गया। शाहिद अमृतपाल सिंह को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई भी नहीं दी गई। उनका पार्थिव शरीर आर्मी वाहन‌ के बजाए प्राइवेट एंबुलेंस से एक आर्मी हवलदार और दो जवान लेकर आए यह शहीदों का अपमान नहीं तो और क्या है?’

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