चित्रकूट मुख्यालय के सोनेपुर क्षेत्र में स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऑडिटोरियम की छत का एक हिस्सा तेज आंधी के दौरान टूटकर गिर जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस हाईटेक और वातानुकूलित भवन को जिले की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जाता है। मंगलवार शाम मौसम अचानक खराब हुआ और तेज हवाओं के बीच छत का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर नीचे गिर पड़ा। हालांकि राहत की बात यह रही कि घटना के समय सभागार में कोई कार्यक्रम नहीं चल रहा था, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। लेकिन इस घटना ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
वीआईपी कार्यक्रमों का केंद्र रहा है यह भवन
करीब एक वर्ष पहले तैयार हुआ यह ऑडिटोरियम 425 लोगों की बैठने की क्षमता रखता है और जिले के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के ऑनलाइन कार्यक्रमों से लेकर विभिन्न सरकारी बैठकों और सांस्कृतिक आयोजनों का आयोजन किया जाता रहा है। ऐसे महत्वपूर्ण भवन की छत का सामान्य आंधी में क्षतिग्रस्त हो जाना लोगों को हैरान कर रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि उसी समय कोई बड़ा कार्यक्रम चल रहा होता तो यह हादसा गंभीर रूप ले सकता था। घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और क्षतिग्रस्त हिस्से का जायजा लिया।
जांच और मरम्मत की तैयारी, प्रशासन ने दिया भरोसा
घटना के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बताया कि तेज हवा के कारण छत पर लगे भारी ब्रिक और संरचनात्मक हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि भवन अभी निर्माण एजेंसी की एक वर्ष की मरम्मत अवधि के अंतर्गत है, इसलिए संबंधित संस्था से इसे ठीक कराया जाएगा। साथ ही तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों की टीम को भी जांच के लिए भेजा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि नुकसान केवल आंधी की वजह से हुआ या निर्माण में कोई तकनीकी कमी भी रही है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
घटना के बाद विपक्षी नेताओं, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। जिला पंचायत सदस्य मीरा भारती सहित कई लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की गई और गुणवत्ता से समझौता किया गया। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि एक वर्ष के भीतर भवन की छत आंधी में टूट जाती है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है ताकि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ हो तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। अब सभी की नजर तकनीकी जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जो इस पूरे मामले की असली तस्वीर सामने ला सकती है।
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