देश के आम उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। आने वाले दिनों में आपकी जेब पर पेट्रोल-डीजल का बोझ कम हो सकता है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिए हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) जैसे ही भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचेगा, घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में कटौती की जा सकती है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने साफ किया कि फिलहाल तेल कंपनियां पहले के महंगे स्टॉक का इस्तेमाल कर रही हैं, जिसकी वजह से वैश्विक बाजार में आई गिरावट का सीधा फायदा तुरंत जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। लेकिन जैसे ही नया और सस्ता स्टॉक उपलब्ध होगा, दाम घटने का रास्ता साफ हो जाएगा।
वैश्विक तनाव और ओएमसी (OMCs) पर बढ़ता दबाव
दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक संकट, विशेष रूप से मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर लगातार अनिश्चितता बनी हुई है। इस वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद, भारत सरकार ने घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों को काफी हद तक काबू में रखने का प्रयास किया है। हालांकि, मौजूदा समय में तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को रोजाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंत्री पुरी ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार ने पूर्व में नवंबर 2021 और मई 2022 के दौरान एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके जनता को बड़ी राहत दी थी, ताकि वैश्विक महंगाई का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर न पड़े।
सोनभद्र की बदली तस्वीर: पिछड़े से बना ‘मॉडल जिला’
अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की विकास यात्रा की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की डेल्टा रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल करने के बाद अब सोनभद्र पिछड़ेपन के टैग से बाहर आ चुका है और एक ‘मॉडल जिला’ बनकर उभरा है। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि साल 2018 में जहां सोनभद्र की प्रति व्यक्ति आय महज 43 हजार रुपये थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 1.2 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। यह बदलाव जिले में हुए आर्थिक और ढांचागत सुधारों की जीती-जागती तस्वीर पेश करता है।
यूपी की अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक उछाल
सोनभद्र के साथ-साथ हरदीप सिंह पुरी ने पूरे उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति का खाका भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि राज्य की कानून-व्यवस्था और उद्योग-अनुकूल नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2016-17 में जहां यूपी की जीडीपी लगभग 13 लाख करोड़ रुपये के आसपास थी, वहीं अब यह तीन गुना के करीब बढ़कर करीब 36 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह स्थिर या कम बनी रहती हैं, तो यूपी सहित पूरे देश को जल्द ही पेट्रोल-डीजल के मोर्चे पर एक बड़ी खुशखबरी मिल सकती है।
