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खेल हो गया? शरद पवार और कांग्रेस के विलय पर आया सबसे बड़ा बयान, दिग्गज नेता ने किया पर्दाफाश!

क्या शरद पवार की एनसीपी का कांग्रेस में होने जा रहा है विलय? महाराष्ट्र कांग्रेस के दिग्गज नेता विजय वडेट्टीवार के इस बड़े खुलासे ने सूबे की सियासत में भूचाल ला दिया है।

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महाराष्ट्र के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने राजनीतिक पंडितों से लेकर आम जनता तक को हैरान कर दिया है। पिछले कुछ समय से पर्दे के पीछे चल रही अटकलों पर अब मुहर लगती दिख रही है। खबर है कि शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) का देश की सबसे पुरानी पार्टी यानी कांग्रेस में विलय हो सकता है। इस बात की सुगबुगाहट तब और तेज हो गई जब कांग्रेस के एक बेहद रसूखदार और वरिष्ठ नेता ने खुद कैमरे के सामने आकर इस बात की पुष्टि कर दी कि दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत का दौर जारी है। इस खुलासे के बाद से ही महाराष्ट्र की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

हाईकमान स्तर पर चल रही है बात, कांग्रेस नेता ने किया बड़ा दावा

इस पूरे मामले पर से पर्दा उठाते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस के सीनियर नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने एक ऐसा दावा किया है जिसने विपक्षी खेमे में हलचल तेज कर दी है। वडेट्टीवार ने साफ तौर पर स्वीकार किया है कि कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) के बीच विलय को लेकर हाईकमान के स्तर पर बेहद गंभीर चर्चा चल रही है। उन्होंने खुले दिल से शरद पवार की विचारधारा का स्वागत करते हुए कहा कि जो लोग भी कांग्रेस और शरद पवार के धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) विचारों में यकीन रखते हैं, उनके लिए कांग्रेस के दरवाजे हमेशा खुले हैं। वडेट्टीवार के इस बयान ने साफ कर दिया है कि यह महज अफवाह नहीं, बल्कि परदे के पीछे एक बड़ी सियासी पटकथा लिखी जा रही है।

25 साल पुराना इतिहास: जब सोनिया गांधी के विरोध में बनी थी NCP

यदि यह विलय हकीकत में बदलता है, तो यह महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश की राजनीति के इतिहास का एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट होगा। इसके पीछे एक दिलचस्प ऐतिहासिक मोड़ भी है। दरअसल, मई 1999 में शरद पवार ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर बगावत की थी और कांग्रेस से अलग होकर ‘नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी’ (NCP) की नींव रखी थी। पिछले ढाई दशकों में शरद पवार ने अपने दम पर इस पार्टी को महाराष्ट्र की सत्ता के शिखर तक पहुंचाया और राज्य की राजनीति के ‘चाणक्य’ कहलाए। लेकिन अब वक्त का पहिया ऐसा घूमा है कि जहां से सफर शुरू हुआ था, कहानी शायद वहीं जाकर खत्म होने वाली है।

अजित पवार की बगावत और पार्टी टूटने के बाद बदला पूरा समीकरण

आखिर ऐसी क्या नौबत आई कि शरद पवार को अपनी ही बनाई पार्टी के वजूद को कांग्रेस में मिलाने पर विचार करना पड़ रहा है? इसका जवाब जून 2023 में हुई एनसीपी की उस ऐतिहासिक टूट में छिपा है। शरद पवार के सगे भतीजे अजित पवार ने चाचा को बड़ा सियासी झटका देते हुए पार्टी के अधिकांश विधायकों के साथ पाला बदल लिया था। इसके बाद कानूनी लड़ाई में शरद पवार के हाथ से न सिर्फ पार्टी का नाम गया, बल्कि उनका ऐतिहासिक चुनाव चिह्न ‘घड़ी’ भी छिन गया। चुनाव आयोग ने अजित पवार के गुट को ‘असली एनसीपी’ माना, जिसके बाद शरद पवार को अपनी पार्टी का नाम बदलकर ‘एनसीपी (शरदचंद्र पवार)’ करना पड़ा। इसी टूट और बदलते समीकरणों के बीच अब धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट करने के लिए कांग्रेस के साथ इस महाविलय की तैयारी की जा रही है।

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