आंध्र प्रदेश के पलनाडु जिले के नरसाराओपेट कस्बे में चोरी की एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। प्रकाश नगर के बालाजी आर्केड अपार्टमेंट में रहने वाले आदि नारायण रेड्डी और उनकी पत्नी कोटेश्वरम्मा बीते महीने 30 जुलाई को अपने एक रिश्तेदार के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गांव गए थे। पीछे से चोरों ने उनके घर को अपना निशाना बनाया और अलमारी तोड़कर 20 लाख रुपये नकद और करीब 317 ग्राम सोने के आभूषण उड़ा ले गए। जब दंपति वापस लौटा तो घर का मंजर देख उनके होश उड़ गए। चोरी की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस सक्रिय हुई, लेकिन अपार्टमेंट के सीसीटीवी फुटेज में कोई भी संदिग्ध चेहरा कैद न होने के कारण जांच एक बड़ी पहेली बन गई। पुलिस की शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि चोरों ने अपार्टमेंट की बिजली हर सुबह 30 मिनट के लिए गुल होने का फायदा उठाकर इस सुनियोजित वारदात को अंजाम दिया था। किसी को भनक तक नहीं लगी कि कब घर खाली हो गया।
काला जादू का खौफ: चोर की अजीबोगरीब दलील और कबूलनामा
चोरी के कुछ दिनों बाद ही इस घटना ने एक ऐसा मोड़ लिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। आदि नारायण रेड्डी के घर के बाहर चप्पल की दुकान के पास एक संदिग्ध थैला लावारिस हालत में पड़ा मिला। जब उस थैले को खोला गया तो उसमें 19 लाख रुपये नकद और एक हस्तलिखित चिट्ठी मिली। इस चिट्ठी को पढ़ने के बाद न केवल पीड़ित परिवार, बल्कि पुलिस के भी कान खड़े हो गए। दरअसल, चोर को यह डर सता रहा था कि पीड़ित परिवार उसकी पहचान करने के लिए ‘अंजनम’ यानी काला जादू या तंत्र-मंत्र का सहारा ले रहा है। खत में चोर ने बड़ी ही मासूमियत और डर के साथ अपनी गलती स्वीकार की और अपना हिस्सा लौटाने की बात कही। उसने साफ तौर पर लिखा कि वह अपनी हिस्से की रकम वापस कर रहा है, ताकि उस पर कोई भी तांत्रिक प्रभाव न पड़े। चोर का लहजा बेहद घबराया हुआ था, जिससे स्पष्ट था कि वह पुलिस की गिरफ्तारी से ज्यादा किसी दैवीय या तांत्रिक प्रकोप से खौफजदा है।
क्या है ‘अंजनम’ का रहस्य और क्यों डरा चोर?
‘अंजनम’ या अंजन-विद्या को ग्रामीण इलाकों में अक्सर गुप्त चीजों का पता लगाने या खोई हुई वस्तुओं और दोषियों को ढूंढने वाली एक रहस्यमयी शक्ति माना जाता है। इस विद्या के प्रति लोगों का गहरा विश्वास है कि इससे चोर के ठिकाने का पता लग जाता है। चोर की घबराहट इस बात की गवाह है कि समाज के कुछ वर्गों में आज भी अंधविश्वास कितना गहरा पैठा हुआ है। चोर ने अपनी चिट्ठी में पीड़ित परिवार से हाथ जोड़कर विनती की कि वे उसे ढूंढने के लिए किसी भी ओझा या तांत्रिक के पास न जाएं और न ही कोई काला जादू करवाएं। उसने लिखा, “प्लीज काला-जादू मत करवाना।” यह मामला अपराध जगत में अपनी तरह का इकलौता है, जहां एक शातिर अपराधी पुलिस की सलाखों से नहीं, बल्कि एक पुराने अंधविश्वास के डर से अपराध का आधा हिस्सा लौटाने को मजबूर हो गया। उसने सोने के गहनों के बारे में चुप्पी साधे रखी और यह भी गुजारिश की कि उनसे सोने को लेकर पूछताछ न की जाए, जिससे संकेत मिलता है कि वह शायद किसी गिरोह का हिस्सा था जहां माल का बंटवारा पहले ही हो चुका था।
पुलिस के लिए उलझी गुत्थी और बढ़ता सस्पेंस
इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर चोर को ‘अंजनम’ का इतना डर क्यों था और क्या वाकई किसी तांत्रिक ने इस मामले में कोई भूमिका निभाई थी? हालांकि, पुलिस का मानना है कि यह केवल एक अपराधी की मनोवैज्ञानिक हार का नतीजा हो सकता है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे अंधविश्वास का मनोविज्ञान कभी-कभी कानून व्यवस्था से ऊपर हो जाता है। फिलहाल 19 लाख रुपये बरामद हो चुके हैं, लेकिन बाकी के 1 लाख रुपये और 317 ग्राम सोने के आभूषण अभी भी गायब हैं, जिसे लेकर पुलिस अभी भी जांच में जुटी है। स्थानीय लोग इस घटना को ‘चमत्कार’ और ‘डर’ का मिश्रण मान रहे हैं। यह घटना एक महत्वपूर्ण सीख है कि कानून का डर समाज में बना रहना चाहिए, लेकिन क्या अंधविश्वास का डर भी इसी तरह काम करेगा? चोर की इस अजीबोगरीब हरकत ने साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कभी-कभी वह अपने ही डर का शिकार होकर खुद ही सबूत छोड़ जाता है। इस पूरे मामले में अब ‘अंजनम’ और ‘चोर’ के इस अजीब रिश्ते की चर्चा हर तरफ है, और पुलिस भी इस अजीब केस को सुलझाने के लिए अलग नजरिये से जांच कर रही है।
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