पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए छह जवानों के नाम पहली बार आधिकारिक रूप से सार्वजनिक किए गए हैं। इन सभी वीर सैनिकों के नाम अब नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल में दर्ज किए जाएंगे। यह सम्मान उन जवानों को दिया जाता है जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी हो। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की आधिकारिक वेबसाइट पर इन शहीदों की जानकारी साझा की गई है। उनके नाम स्मारक के ‘त्याग चक्र’ का हिस्सा बनेंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी उनके साहस और बलिदान को हमेशा याद रख सकें।
पांच सैनिक और एक वायुसेना सार्जेंट ने दिया सर्वोच्च बलिदान
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद होने वाले छह जवानों में भारतीय सेना के पांच सैनिक और भारतीय वायुसेना के एक सार्जेंट शामिल हैं। इन वीरों के नाम हैं—सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मूड मुरली नाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार। देश की रक्षा करते हुए इन सभी जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। इनमें से दो जवानों को उनकी असाधारण बहादुरी के लिए मरणोपरांत सैन्य सम्मान भी प्रदान किया गया। राइफलमैन सुनील कुमार को वीर चक्र और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को वायु पदक से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक माना जाता है।
राष्ट्रपति ने किया वीरता का सम्मान
राइफलमैन सुनील कुमार ऑपरेशन के दौरान नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर तैनात थे। उनके साहस को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया, जो देश का तीसरा सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है। रक्षा अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यह सम्मान उनके परिजनों को प्रदान किया। वहीं, भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को भी उनके साहसिक योगदान के लिए मरणोपरांत वायु पदक दिया गया। इन सम्मानों के जरिए देश ने अपने उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी है, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके परिवारों के लिए यह सम्मान गर्व और भावनाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पल रहा।
नेशनल वॉर मेमोरियल पर हमेशा के लिए अमर रहेंगे नाम
नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल का ‘त्याग चक्र’ उन सभी सैनिकों को समर्पित है, जिन्होंने आजादी के बाद देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। इस स्मारक की ग्रेनाइट दीवारों पर शहीदों के नाम, पद और उनकी यूनिट स्थायी रूप से अंकित किए जाते हैं। अब ऑपरेशन सिंदूर के इन छह वीर जवानों के नाम भी इस गौरवशाली सूची का हिस्सा बनेंगे। यह सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि देश की ओर से उन सैनिकों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है, जिन्होंने अपने कर्तव्य के लिए सबसे बड़ा बलिदान दिया। उनका साहस और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और सेवा की प्रेरणा देता रहेगा।
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