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यूपी में आधी रात अचानक सड़क पर आए शंकराचार्य, बिना बिजली-पंखे टेंट में कटी रात; जानें प्रशासन के एक फैसले ने कैसे खड़ा किया बड़ा विवाद!

यूपी के कन्नौज में आधी रात शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सड़क किनारे टेंट में क्यों गुजारनी पड़ी रात? प्रशासन की ना और कड़कड़ाती गर्मी के बीच क्या है पूरा मामला

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उत्तर प्रदेश के कन्नौज से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर तरफ हलचल पैदा कर दी है। सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरुओं में से एक, ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बुधवार की पूरी रात सड़क किनारे बने एक अस्थायी टेंट में गुजारनी पड़ी। बताया जा रहा है कि शंकराचार्य अपनी ‘गौ विष्टि यात्रा’ के सिलसिले में कन्नौज पहुंचे थे। तय कार्यक्रम के अनुसार, उनका रात्रि विश्राम छिबरामऊ के सलेमपुर इलाके में स्थित आशा पब्लिक स्कूल में होना था। लेकिन ऐन वक्त पर आए प्रशासन के एक फैसले ने सब कुछ बदल कर रख दिया। आयोजकों का आरोप है कि बुधवार की शाम को प्रशासन ने अचानक स्कूल में ठहरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।

भीषण गर्मी में हाथ के पंखों से दी गई हवा, तैनात रही भारी पुलिस फोर्स

प्रशासन की तरफ से अनुमति निरस्त होने के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने किसी अन्य जगह जाने के बजाय पाल चौराहा स्थित स्वागत स्थल पर ही रुकने का फैसला किया। आनन-फानन में वहां एक अस्थायी टेंट लगाया गया। जून महीने की इस भीषण और उमस भरी गर्मी में उस टेंट के भीतर न तो बिजली की कोई व्यवस्था थी और न ही कोई पंखा चल रहा था। इस विकट स्थिति में शंकराचार्य के सेवकों ने पूरी रात हाथ के पंखों (बेना) से हवा झलकर उन्हें राहत पहुंचाने की कोशिश की। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान माहौल में तनाव को देखते हुए टेंट के चारों तरफ भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा, ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो सके।

‘गौ माता’ को राष्ट्र माता बनाने का संकल्प, रुकने वाली नहीं है यह यात्रा

इस पूरी असुविधा और रात भर चले ड्रामे के बाद भी शंकराचार्य के हौसले में कोई कमी नहीं दिखी। गुरुवार सुबह करीब 8 बजे जब वह अपने काफिले के साथ फर्रुखाबाद के लिए रवाना होने लगे, तो उन्होंने मीडिया से खुलकर बात की। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दो टूक शब्दों में कहा कि मुश्किलें चाहे जितनी आएं, उनकी यह यात्रा रुकने वाली नहीं है। उन्होंने बताया कि वह अब तक प्रदेश के लगभग 150 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गाय को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाना है। इसके साथ ही वह समाज में गौ-संरक्षण, गौ-पालन और सनातन धार्मिक मूल्यों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट, प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल

शंकराचार्य जैसे बड़े धार्मिक व्यक्तित्व के साथ हुए इस व्यवहार के बाद अब इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर काफी नाराजगी है कि आखिर प्रशासन ने ऐन वक्त पर स्कूल में रुकने की अनुमति क्यों रद की? हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक और स्पष्टीकरण वाला बयान सामने नहीं आया है। लेकिन इस घटना ने सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले पर प्रशासन की तरफ से क्या सफाई आती है और आने वाले दिनों में इस पर क्या राजनीतिक मोड़ देखने को मिलता है।

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